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MANOJ KUMAR: 87 साल की उम्र में ‘ भारत कुमार ‘ का निधन!

मनोज कुमार (MANOJ KUMAR) के अभिनय की शुरुआत फिल्म ‘फैशन’ (1957) में एक छोटी सी भूमिका से हुई, पहली मुख्य भूमिका ‘कांच की गुड़िया’ (1960) थी

अभिनेता-निर्देशक मनोज कुमार (MANOJ KUMAR) का लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार (4 अप्रैल) सुबह 87 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने एक सच्चा लीजेंड खो दिया। देशभक्ति से ओतप्रोत भूमिकाओं के लिए ‘भारत कुमार’ के नाम से मशहूर मनोज कुमार का मुंबई में निधन हो गया। मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में सुबह करीब 3:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। अस्पताल की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक उनका निधन दिल की समस्या के कारण हुआ।

170 करोड़ रुपए की कुल संपत्ति

उनकी संपत्ति और यादगार फिल्मों के बारे में। उनका जन्म 13 जुलाई 1937 को एबटाबाद (अब पाकिस्तान में) में हरिकिशन गिरी गोस्वामी के घर में हुआ था। बंटवारे के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया, जहां उन्हें फिल्मों से प्यार हो गया। 1949 की फिल्म शबनम में दिलीप कुमार के किरदार से प्रेरित होकर उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री करते ही अपना नाम बदलकर मनोज कुमार रख लिया सेलिब्रिटी नेट वर्थ के अनुसार, मनोज कुमार की कुल संपत्ति 20 मिलियन डॉलर (करीब 170 करोड़ रुपये) आंकी गई है।

MANOJ KUMAR को मिले हैं कई पुरस्कार

मनोज कुमार (MANOJ KUMAR) को कई पुरस्कार मिल चुके हैं। 1992 में उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया। उन्होंने कई फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीते, जिनमें उपकार और रोटी कपड़ा और मकान के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार शामिल है। उनके काम की नियमित रूप से भावना, सामाजिक संदेश और राष्ट्रीय गौरव के मिश्रण के लिए प्रशंसा की जाती थी।

1957 से MANOJ KUMAR का फिल्मी सफर हुआ शुरू

मनोज कुमार (MANOJ KUMAR) के अभिनय की शुरुआत फिल्म ‘फैशन’ (1957) में एक छोटी सी भूमिका से हुई। उनकी पहली मुख्य भूमिका ‘कांच की गुड़िया’ (1960) थी। लेकिन उन्हें असली पहचान 1962 में फिल्म ‘हरियाली और रास्ता’ से मिली।उन्होंने अपने जीवन में एक अभिनेता, निर्देशक और पटकथा लेखक के रूप में काम किया। अभिनय के अलावा, उन्होंने अपनी कुछ सबसे प्रसिद्ध फिल्मों का निर्देशन भी किया। ये फिल्में बॉक्स-ऑफिस पर हिट रहीं। मनोज कुमार की जिन फिल्मों ने उन्हें भारतीय सिनेमा में मशहूर बना दिया उनमें हरियाली और रास्ता (1962), वो कौन थी? (1964), हिमालय की गोद में (1965), शहीद (1965), उपकार (1967), पूर्व और पश्चिम (1970), रोटी कपड़ा और मकान (1974) और क्रांति (1981)।

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