बॉलीवुड की दिग्गज और बेहद खूबसूरत अभिनेत्रियों में शुमार मनीषा कोइराला (Manisha Koirala) एक बार फिर अपने अभिनय और संजीदगी को लेकर चर्चा में हैं। 90 के दशक में अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली मनीषा ने अपनी जिंदगी में जितने ऊंचे मुकाम देखे, उतने ही गहरे और दर्दनाक दौर भी सहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर यानी चौथी स्टेज के कैंसर (Stage 4 Ovarian Cancer) से अपनी जंग को याद करते हुए बेहद भावुक बातें साझा की हैं।
साल 2012 में जब मनीषा को ओवेरियन कैंसर का पता चला था, तो उनकी दुनिया पूरी तरह बिखर गई थी। न्यूयॉर्क में हुई लंबी सर्जरी और कीमोथेरेपी के जरिए उन्होंने इस जानलेवा बीमारी को मात तो दे दी, लेकिन उस बीमारी के अहसास और इलाज के दौरान का अकेलापन आज भी उनके जेहन में ताजा है।
‘गहरे अंधेरे जैसा था वो खौफनाक पल’: अस्पताल की वो पहली रात
हाल ही में यूट्यूबर सुशांत प्रधान के पॉडकास्ट (Sushant Pradhan Podcast) में अपनी आपबीती शेयर करते हुए मनीषा कोइराला ने बताया कि जिस दिन उन्हें इस जानलेवा बीमारी का पता चला था, अस्पताल में बीती वह रात उनके जीवन की सबसे लंबी, अंधेरी और अकेली साबित हुई थी।
“अस्पताल की उस रात मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मैं किसी बेहद गहरे अंधेरे में उतर रही हूं। हर पल यही डर सता रहा था कि अब सब खत्म होने वाला है और मेरी मौत करीब है।” — मनीषा कोइराला
अभिनेत्री ने बताया कि गंभीर बीमारी से गुजरते समय इंसान शारीरिक दर्द से ज्यादा मानसिक रूप से टूटता है। उन्होंने कहा कि अकेलापन जीवन का एक कड़वा सच है और कई बार बड़ी-बड़ी महफिलों, चकाचौंध और लोगों की भारी भीड़ के बीच होने के बावजूद इंसान खुद को पूरी तरह कटा हुआ और अकेला महसूस करता है।
जीवन के प्रति बदला नजरिया और बदलीं प्राथमिकताएं
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग जीतने के बाद मनीषा कोइराला का जीवन को देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल गया। जब जिंदगी ने उन्हें दोबारा जीने का मौका दिया, तो उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं तय कीं।
- गैर-जरूरी चीजों से दूरी: उन्होंने उन सभी चीजों, आदतों और लोगों को खुद से दूर कर दिया जो उनके सिद्धांतों और मानसिक शांति से मेल नहीं खाती थीं।
- सेहत और ईश्वर के प्रति आभार: मनीषा ने स्वीकार किया कि बीमारी से पहले वह अपनी हेल्थ को लेकर काफी लापरवाह थीं, लेकिन अब उनकी सेहत, परिवार, प्रकृति और ईश्वर का आभार व्यक्त करना ही उनकी पहली प्राथमिकता है।
- सीमित और भरोसेमंद दायरा: अब वह अपने इर्द-गिर्द झूठी और बड़ी भीड़ रखने के बजाय सिर्फ कुछ बेहद खास और भरोसेमंद दोस्तों के साथ समय बिताना पसंद करती हैं।
काम के बोझ से आई थकान और गलत फैसलों पर आत्ममंथन
अपने शुरुआती फिल्मी करियर को याद करते हुए मनीषा ने बताया कि एक दौर ऐसा भी था जब वह बिना किसी ब्रेक के लगातार काम कर रही थीं। वह दिन में 18-18 घंटे शूटिंग करती थीं और एक साथ कई फिल्मों का हिस्सा हुआ करती थीं।
लगातार काम की वजह से वह मानसिक रूप से इस कदर थक चुकी थीं कि उन्होंने फिल्मों के चयन में कुछ गलत फैसले भी ले लिए। हालांकि, जब कैंसर के इलाज के दौरान दुनिया भर से उनके फैंस ने उनके जल्द ठीक होने के लिए दुआएं भेजीं, तब उन्हें अहसास हुआ कि उनके काम ने लोगों के दिलों में कितनी खास जगह बनाई है। इसके बाद उन्होंने तय किया कि वह अब क्वांटिटी (काम की संख्या) के बजाय क्वालिटी (काम की गुणवत्ता) पर ध्यान देंगी।
‘सौदागर’ से ‘हीरामंडी’ तक का शानदार अभिनय सफर
मनीषा कोइराला के फिल्मी सफर पर नजर डालें तो उनकी गिनती हिंदी सिनेमा की बेहतरीन अभिनेत्रियों में होती है।
- डेब्यू और क्लासिक फिल्में: साल 1991 में सुभाष घई की फिल्म ‘सौदागर’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मनीषा ने इसके बाद ‘1942: ए लव स्टोरी’, ‘बॉम्बे’, ‘खामोशी’, ‘गुप्त’, ‘दिल से..’ और ‘कंपनी’ जैसी कालजयी फिल्मों से अपनी अमिट छाप छोड़ी।
- कैंसर के बाद धमाकेदार वापसी: बीमारी से पूरी तरह ठीक होने के बाद उन्होंने ‘संजू’ और ‘डियर माया’ जैसी फिल्मों से बड़े पर्दे पर मजबूत वापसी की।
- ओटीटी पर ‘मल्लिकाजान’ का जलवा: हाल ही में संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज ‘हीरामंडी: द डायमंड बाजार’ में ‘मल्लिकाजान’ के अपने दमदार किरदार से मनीषा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बेहतरीन कला कभी फीकी नहीं पड़ती। उनके इस अभिनय की क्रिटिक्स और दर्शकों दोनों ने जमकर तारीफ की।
मनीषा कोइराला की यह कहानी सिर्फ एक बॉलीवुड स्टार की आपबीती नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: मनीषा कोइराला को कौन सा कैंसर हुआ था और यह कब पता चला?
Ans: मनीषा कोइराला को साल 2012 में चौथी स्टेज के ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer) का पता चला था। इसके बाद उन्होंने अमेरिका (न्यूयॉर्क) में लंबी सर्जरी और कीमोथेरेपी कराकर इस बीमारी को पूरी तरह मात दी।
Q2: कैंसर से ठीक होने के बाद मनीषा कोइराला की जीवनशैली में क्या बदलाव आया?
Ans: बीमारी के बाद मनीषा ने अपनी सेहत, परिवार और प्रकृति को प्राथमिकता दी। उन्होंने गैर-जरूरी चीजों को जिंदगी से हटा दिया, काम की क्वांटिटी की जगह क्वालिटी चुनी और सीमित लेकिन सच्चे दोस्तों के साथ रहना शुरू किया।
Q3: मनीषा कोइराला ने किस फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी?
Ans: मनीषा कोइराला ने साल 1991 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सौदागर’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसमें उनके साथ अभिनेता विवेक मुशरान, दिलीप कुमार और राज कुमार मुख्य भूमिकाओं में थे।
Q4: हाल ही में मनीषा कोइराला किस वेब सीरीज में नजर आई हैं?
Ans: मनीषा कोइराला हाल ही में प्रसिद्ध निर्देशक संजय लीला भंसाली की नेटफ्लिक्स सीरीज ‘हीरामंडी: द डायमंड बाजार’ में ‘मल्लिकाजान’ की मुख्य भूमिका में नजर आई थीं, जहां उनके अभिनय की बेहद तारीफ हुई।
Q5: कैंसर के दौर में मनीषा कोइराला को मानसिक रूप से किस चीज ने सबसे ज्यादा परेशान किया?
Ans: पॉडकास्ट में मनीषा ने बताया कि अस्पताल की रातों का गहरा अंधेरा, मौत का खौफ और बीमारी के दौरान महसूस होने वाला मानसिक अकेलापन उनके लिए शारीरिक दर्द से भी ज्यादा डरावना और तकलीफदेह था।
मनीषा कोइराला का यह सफर हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि आपके भीतर जीने की इच्छाशक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण है, तो आप जिंदगी की सबसे बड़ी जंग भी जीत सकते हैं।
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