Manikarnika Ghat Demolition: वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने की घटना को लेकर इंदौर में गहरा असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। गुरुवार को धनगर समाज सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ नागरिकों की एक बैठक आयोजित हुई, जिसमें देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित इस घाट के मूल स्वरूप को पुनः बहाल करने तथा दोषी अधिकारियों को दंडित करने की मांग की गई।
Manikarnika Ghat Demolition: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य के दौरान देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित संरचनाओं और मूर्तियों को कथित रूप से क्षति पहुंचने की घटना ने धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े लोगों में गहरा रोष पैदा कर दिया है। यह घाट हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है और लगभग 250 वर्ष पुरानी इस धरोहर पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विपक्षी दल, समाजसेवी और स्थानीय संगठन सड़कों पर उतर आए हैं।
प्रशासन पर सख्त कार्रवाई की मांग
इंदौर में गुरुवार को महाराजा यशवंतराव स्कूल में धनगर समाज सहित अन्य समुदायों के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में श्री अहिल्योत्सव समिति के पदाधिकारी, वरिष्ठ नागरिक, अहिल्या भक्त और विभिन्न समाजों के लोग शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में मांग की कि वाराणसी प्रशासन देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा 1771 में निर्मित मणिकर्णिका घाट के मूल स्वरूप को बहाल करे।
समिति ने बताया कि यह घाट न केवल ऐतिहासिक महत्व का है, बल्कि हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र भी रहा है। उन्होंने कहा, “बिना उचित योजना और विचार-विमर्श के इस तरह की कार्रवाई अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। विकास के नाम पर ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करना अस्वीकार्य है।”
विभिन्न समाजों का एकजुट विरोध
बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों का विरोध नहीं है, लेकिन जनकल्याण के लिए बने मंदिरों और घाटों को नासमझी में ध्वस्त करना समाज की भावनाओं को आहत करता है। धनगर, गड़रिया, पाल, बघेल सहित धनगर समाज की सभी उपजातियों ने इस कार्रवाई को गलत ठहराया। प्रतिभागियों ने दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई, घाट का पुनर्निर्माण और अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमाओं की पुनः स्थापना की मांग की।
सुमित्रा महाजन का सुझाव
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इस मुद्दे पर खासगी ट्रस्ट के पदाधिकारियों को सलाह दी कि वे प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखें। उन्होंने बताया कि उन्होंने वाराणसी नगर निगम की जारी सूचना प्राप्त की है और स्थानीय लोगों से चर्चा की है। महाजन के अनुसार, विकास कार्य के दौरान हुई गलती स्वीकार की गई है तथा क्षतिग्रस्त हिस्सों को सुधारने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सुधार प्रक्रिया में समय लग सकता है, लेकिन समाधान अवश्य निकलेगा।
