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Mamta Banerjee Resign Controversy : ममता बनर्जी से पहले इन CM ने इस्तीफा देने से किया था मना, अनुच्छेद 172 से बनी थी नई सरकार

Mamta Banerjee Resign Controversy : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद एक नई समस्या आ खड़ी हुई है। बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद और टीएमसी के चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। ममता बनर्जी ने साफ कह दिया है कि ये वोट की लूट कर चुनाव जीते हैं। मैं इस फैसले को नहीं मानूंगी और नही इस्तीफा दूंगी और न राजभवन जाऊंगी। ममता बनर्जी ने भी ये कहा कि उन्होंने 15 सालों में सैलरी का एक रुपया नहीं लिया है.. अब तो वह आजाद हो गईं हैं। ये शब्द अपने ही बंगाल को हारने के बाद ममता बनर्जी के हैं, जिसके बाद बंगाल की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देंगी तो क्या करेगी बीजेपी?

बंगाल में चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी ने स्पष्ट कहा है कि वह चुनाव नहीं हारी हैं, इसलिए पद नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने भाजपा पर बेईमानी से जीत हासिल करने और चुनाव आयोग को मुख्य विलेन बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। लेकिन इसके बाद… अब नया विवाद ये उठ रहा है कि अगर ममता बनर्जी सीएम पद से इस्तीफा देंगी नहीं तो जीते हुए दल से नया सीएम शपथ कैसे ग्रहण करेगा। बता दें सीएम पद की शपथ ग्रहण के लिए 9 मई का दिन तय किया गया है। ऐसे में केंद्र सरकार और बंगाल के गर्वनर अब कानूनों का दाव-पेंच खेलने को तैयार हैं। यानी अभी भी एक रास्ता है जब ममता बनर्जी के बिना इस्तीफा दिए ही अगली सरकार शपथ ग्रहण कर सकती है और वो कानून रास्ता कौन सा है ये जानने से पहले,, आपको ये बताते हैं कि ममता बनर्जी से पहले कितने सीएम ने शपथ देने से इनकार किया है।

ममता से पहले इन सीएम ने इस्तीफा देने से किया था मना

बंगाल में ममता बनर्जी के इस्तीफा देने से मना करने के बाद राजनीति के गलियारे में ऐसे उदाहरणों की चर्चा तेज हो गई है, जब मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार नहीं हुए। हालिया उदाहरणों की अगर बात करें तो इनमें पहला नाम दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का आता है, जिन्होंने 2024 में कथित शराब नीति केस में गिरफ्तारी के बाद भी इस्तीफा देने से मना कर दिया था। वहीं बिहार में साल 2015 में जीतन राम मांझी और कर्नाटक में 2007 में एच.डी. कुमारस्वामी ने भी सत्ता छोड़ने व से सीएम पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, जिससे कुछ ऐसी ही राजनीतिक संकट की स्थिति बन गई थी।

अनुच्छेद 172 का हो सकता है इस्तेमाल

अब ये भी जान लेते हैं कि जब कोई चुनाव हारा हुआ सीएम अपने पद से स्तीफा देने से मना करता है तो कानून यानी संवैधानिक स्थिति क्या कहती है? यहां पर ऐसी स्थिति में संविधान का अनुच्छेद 164 लागू होता है। इस अनुच्छेद के अनुसार, कोई भी मुख्यमंत्री राज्यपाल की इच्छा तक पद पर बना रह सकता है, लेकिन यह इच्छा वास्तव में विधानसभा में बहुमत के समर्थन पर आधारित होती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही किसी मुख्यमंत्री के पास बहुमत का समर्थन नहीं रह जाता, राज्यपाल कभी भी मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर सकता हैं और नए नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकता है। वहीं, अनुच्छेद 172 कहता है कि किसी भी विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है और तय अवधि पूरी होने पर वह खुद ही भंग हो जाती है। इसका मतलब है कि चुनाव परिणामों और नई विधानसभा के गठन के बाद सत्ता परिवर्तन संवैधानिक रूप से अनिवार्य प्रक्रिया बन जाती है।

क्या कहते हैं संवैधानिक विशेषज्ञ?

इस मामले में संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए केवल बहुमत का समर्थन जरूरी होता है, न कि व्यक्तिगत घोषणा या इनकार। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर निवर्तमान मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं भी देते, तब भी राज्यपाल नई विधानसभा में बहुमत प्राप्त नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य का कहना है कि “संवैधानिक रूप से कोई सरकार पांच साल से अधिक नहीं चल सकती और नए जनादेश के बाद पुरानी सरकार का औचित्य समाप्त हो जाता है।

फिलहाल भाजपा ने ममता बनर्जी के बयान को संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ बता दिया है। भाजपा ने कहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को स्वीकार करना हर जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है, जबकि टीएमसी ने अपने रुख को सही ठहराते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं। अब बंगाल में सियासी तनाव के बीच सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आगे सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और क्या ममता बनर्जी अपने रुख पर कायम रहती हैं या संवैधानिक प्रक्रिया के तहत बदलाव होता है।

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