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मालदा हिंसा मामला: सुकांता मजूमदार का आरोप, NIA से बचाने के लिए हुई CID की गिरफ्तारी

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पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर तनातनी बढ़ गई है। वर्तमान मालदा हिंसा मामला अब राज्य सरकार और विपक्ष के बीच नई बहस का केंद्र बन गया है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता सुकांता मजूमदार ने राज्य की जांच एजेंसी सीआईडी (CID) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका सीधा आरोप है कि मुख्य आरोपी मोफक्किरुल इस्लाम की गिरफ्तारी उसे सजा दिलाने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की कड़ी पूछताछ से बचाने के लिए की गई है।

मालदा हिंसा मामला: सीआईडी की कार्रवाई पर क्यों उठे सवाल?

हाल ही में बंगाल के बालुरघाट में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुकांता मजूमदार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के निर्देश पर इस घटना की जांच एनआईए कर रही है। लेकिन केंद्रीय एजेंसी के पहुंचने से ठीक पहले सीआईडी का सक्रिय होना संदेह पैदा करता है।

मजूमदार ने कहा कि यह गिरफ्तारी वास्तव में न्याय प्रक्रिया का हिस्सा है या किसी को बचाने की राजनीतिक चाल, यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। उन्होंने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

भाजपा नेता ने मोफक्किरुल इस्लाम और टीएमसी के शीर्ष नेताओं के साथ उसकी कथित तस्वीरों का भी जिक्र किया। उन्होंने तर्क दिया कि ये तस्वीरें स्पष्ट रूप से आरोपी के राजनीतिक संपर्कों को उजागर करती हैं।

हिरासत से फेसबुक लाइव ने बढ़ाई सरगर्मी

केंद्रीय मंत्री ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए एक हैरान करने वाला दावा किया। उन्होंने बताया कि सीआईडी की हिरासत में होने के बावजूद मोफक्किरुल फेसबुक पर लाइव आकर संदेश दे रहा है।

इस घटना को उठाते हुए मजूमदार ने कहा कि हिरासत में फोन और इंटरनेट की सुविधा मिलना यह साबित करता है कि आरोपी को वहां आरामदेह जीवन दिया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर एनआईए उसे पकड़ती, तो वहां की “चाय थोड़ी कड़वी होती।”

मजूमदार के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजनीतिक समीकरणों और अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करने के उद्देश्य से मुख्य आरोपी को राज्य पुलिस के सुरक्षित घेरे में ले लिया है।

पुलिस प्रशासन का क्या कहना है?

विपक्ष के इन गंभीर आरोपों के बीच पुलिस महकमे ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उत्तर बंगाल के एडीजी (ADG) के. जयरामन ने बताया कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए त्वरित कार्रवाई की है।

एडीजी के मुताबिक, मुख्य आरोपी मोफक्किरुल इस्लाम को बागडोगरा एयरपोर्ट से उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह अपने घर की ओर जा रहा था। उस पर लोगों को भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप है।

पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या पूरी घटना किसी पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी प्रकार की हिंसा या अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन इसके आड़ में कानून हाथ में लेने की छूट किसी को नहीं है।

मालदा हिंसा मामला: 35 आरोपियों की हुई गिरफ्तारी

अब तक इस पूरी घटना में पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह मामला सीधे तौर पर न्यायपालिका से जुड़ा होने के कारण और भी संवेदनशील हो गया है।

दरअसल, 1 अप्रैल को मालदा जिले में ग्रामीणों ने तीन महिला अधिकारियों सहित कुल सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था। इस गंभीर घटना के बाद से ही इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।

न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने उन्हें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की सुरक्षा मुहैया कराई है। घटना के दिन बचाव कार्य में हुई देरी के कारणों का भी पता लगाया जा रहा है, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी।

बंगाल में केंद्रीय बनाम राज्य एजेंसियों का टकराव

पश्चिम बंगाल में यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े आपराधिक मामले में राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मामलों में अक्सर जांच की दिशा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझ कर रह जाती है।

मालदा हिंसा मामला

भी अब इसी दिशा में बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। एक तरफ भाजपा इसे राज्य सरकार की नाकामी और अपराधियों को संरक्षण देने का मुद्दा बना रही है। वहीं, राज्य प्रशासन अपनी त्वरित कार्रवाई का हवाला देकर हालात को नियंत्रण में होने का दावा कर रहा है। आने वाले दिनों में एनआईए की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह देखना बेहद अहम होगा।

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