रीवा स्थित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APS University) में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रही भोपाल की ‘वीआईएस सिक्योरिटी एजेंसी’ (VIS Security Agency) के खिलाफ सुरक्षाकर्मियों ने मोर्चा खोल दिया है। कंपनी प्रबंधन पर आर्थिक शोषण और बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सुरक्षा गार्डों ने यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई (NSUI) के छात्र नेताओं के समर्थन के साथ विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। इस विरोध प्रदर्शन के कारण विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
साढ़े सात हजार में काम कराने और पीएफ कटौती का आरोप
आंदोलन कर रहे सुरक्षाकर्मियों का आरोप है कि सिक्योरिटी कंपनी विगत 3 वर्षों से उनका भयंकर आर्थिक शोषण कर रही है। नियमों के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रति कर्मचारी करीब 15 हजार रुपये तक का भुगतान लिया जा रहा है, लेकिन ग्राउंड पर तैनात सुरक्षा गार्डों को मात्र 7,400 रुपये मासिक वेतन ही दिया जा रहा है। इसके अलावा, भविष्य निधि (PF) के नाम पर भी बड़ा खेल किया जा रहा है; पूर्व में कर्मचारियों से 1800 रुपये पीएफ काटने का वादा किया गया था, जबकि वर्तमान में उनके खाते से महज 300 रुपये ही जमा किए जा रहे हैं।
हक मांगने पर नौकरी से निकालने की धमकी और फर्जी हाजिरी का खेल
सुरक्षाकर्मियों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि जब भी उन्होंने वेतन वृद्धि या अपने हक की आवाज उठाई, तो कंपनी के अधिकारियों द्वारा उन्हें सीधे काम से बाहर करने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, यदि कोई कर्मचारी जायज छुट्टी पर भी जाता है, तो उसे मोबाइल पर नौकरी से हटाए जाने का फरमान भेज दिया जाता है। प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने इस मामले में एक और सनसनीखेज आरोप लगाया है कि कागजों पर कुल 77 कर्मचारियों का वेतन और भुगतान उठाया जा रहा है, जबकि मौके पर केवल 30 से 35 गार्ड ही तैनात रहते हैं।
कुलपति और श्रम विभाग की भूमिका पर सवाल, उच्च स्तरीय जांच की मांग
छात्र नेताओं और पीड़ित कर्मचारियों का साफ कहना है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा विश्वविद्यालय प्रबंधन, कुलपति, रजिस्ट्रार और स्थानीय श्रम विभाग की नाक के नीचे चल रहा है, जो बिना किसी आंतरिक साठगांठ के मुमकिन नहीं है। इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति को एक शिकायती ज्ञापन सौंपा है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक इस पूरे सुरक्षा एजेंसी घोटाले की उच्च स्तरीय जांच नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई के साथ उनका बकाया वेतन नहीं मिलता, तब तक उनका काम बंद प्रदर्शन और धरना इसी तरह जारी रहेगा।

