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अमित शाह का सिर काटकर टेबिल पर रख देना चाहिए- महुआ मोइत्रा

Mahua Moitra Amit Shah Controversy: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra ) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) पर एक विवादास्पद (Mahua Moitra Controversial Statement On Amit Shah) बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में शुक्रवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए मोइत्रा ने घुसपैठ के मुद्दे पर गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की होती है। अगर घुसपैठ हो रही है तो अमित शाह का सिर काटकर टेबिल पर रख देना चाहिए (Amit Shah’s head should be cut off and placed on the table)।

“मोइत्रा का यह बयान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए तीखी आलोचना के रूप में सामने आया है। बीजेपी ने इसे “हिंसक और अपमानजनक” बताते हुए तृणमूल कांग्रेस की “हिंसक संस्कृति” का प्रतीक करार दिया। बीजेपी की बंगाल इकाई ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “महुआ मोइत्रा का गृह मंत्री के खिलाफ ‘सिर काटने’ वाला बयान पश्चिम बंगाल की छवि को धूमिल करता है और राज्य के विकास में बाधा डालता है।

“बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मोइत्रा के बयान के साथ उनकी तस्वीर और नाम साझा करते हुए इसकी कड़ी निंदा की। पार्टी ने इसे राष्ट्रीय राजनीतिक diskourse में एक नया निम्न स्तर बताया। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि मोइत्रा का बयान उनकी व्यक्तिगत राय हो सकता है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में एक व्यक्ति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए गिरफ्तार किया गया है। बीजेपी ने दोनों घटनाओं को जोड़ते हुए विपक्ष पर “हिंसक बयानबाजी” को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

महुआ मोइत्रा इससे पहले भी अपने तीखे बयानों और केंद्र सरकार की आलोचना के लिए चर्चा में रही हैं। 2019 में उनकी “सात संकेतों वाला फासीवाद” भाषण ने व्यापक सुर्खियां बटोरी थीं। इस नए विवाद ने एक बार फिर उनके और बीजेपी के बीच तनाव को उजागर किया है।विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है।

कुछ नेताओं ने मोइत्रा के बयान को “अनुचित” बताया, जबकि अन्य ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में समर्थन किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद 2024 के आम चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच चल रही तीखी राजनीतिक जंग को और तेज कर सकता है।

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