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Mahatma Gandhi Truth : क्या गाँधी जी को सेक्स की बुरी लत थी? किताब में लिखा सच है या झूठ… 

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Mahatma Gandhi Truth : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जीवन केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्में मोहनदास करमचंद गांधी ने साधारण जीवन जीते हुए असाधारण उपलब्धियां हासिल कीं। महात्मा गांधी को विश्व स्तर पर शांति और अहिंसा का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, उनके निजी जीवन, खासकर ब्रह्मचर्य और कामुकता से जुड़े विचार और प्रयोग, लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं। ब्रिटिश इतिहासकार जैड एडम्स की किताब “गांधी: नेकेड एम्बिशन” (2010) और गिरिजा कुमार की “ब्रह्मचर्य गांधी और उनकी महिला मित्र” (2006) जैसी पुस्तकों ने गांधी के महिलाओं के साथ असामान्य व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।

किसने गाँधी जी को यौन रूप से बीमार बताया 

एडम्स ने 15 वर्षों के शोध के बाद गांधी को यौन रूप से दमनकारी व्यक्ति बताया है, जिसने ब्रह्मचर्य के प्रयोग किए, जिनमें युवा महिलाओं के साथ नग्न सोना और स्नान करना शामिल है। कुमार ने इन प्रथाओं में भाग लेने वाली करीब 18 महिलाओं का उल्लेख किया है, जिनमें मनु, आभा गांधी और सुशीला नायर जैसी करीबी सहयोगी थीं। कथित तौर पर कुछ महिलाओं को नग्न रहने के दौरान मालिश करने का काम भी सौंपा गया था, जिसे गांधी ने अपने आध्यात्मिक अनुशासन का हिस्सा बताया।

मनु के साथ निर्वस्त्र सोए थे गाँधी जी? 

एडम्स के अनुसार, जब बंगाल के नोआखली में दंगे हो रहे थे, तब गांधी ने मनु को बुलाकर कहा, “अगर तुम मेरे साथ नहीं होती तो मुस्लिम चरमपंथी हमें मार डालते। आओ आज से हम दोनों निर्वस्त्र होकर सोएं और अपने ब्रह्मचर्य का परीक्षण करें।”

सुशीला के साथ गाँधी जी निर्वस्त्र नहाते थे 

किताब में महाराष्ट्र के पंचगनी में भी ब्रह्मचर्य के प्रयोग का जिक्र है, जहां गांधी के साथ सुशीला नाहती और सोती थीं। एडम्स के मुताबिक गांधी ने लिखा है कि नहाते समय जब सुशीला निर्वस्त्र होती थी, तो उसकी आंखें बंद कर लेते थे ताकि कुछ न देखें।

बोस ने किया था गाँधी जी के ब्रह्मचर्य का विरोध 

महात्मा गांधी के करीब रहे निर्मल कुमार बोस ने अपनी पुस्तक “माई डेज़ विद गांधी” में इन प्रयोगों का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि एक बार जब वे गांधी के कमरे में पहुंचे तो सुशीला रो रही थीं और गांधी जी दीवार में अपना सिर पटक रहे थे। इस घटना के बाद बोस ने इन ब्रह्मचर्य प्रयोगों का विरोध किया और गांधी जी से दूरी बना ली।

आश्रम की कई महिलाओं ने कभी शादी नहीं की 

विरोधियों का तर्क है कि इन कृत्यों ने गांधी के आश्रम में महिलाओं का भरोसा तोड़ा और उनके जीवन को प्रभावित किया। कई महिलाओं ने शादी नहीं की या बाद में भावनात्मक रूप से परेशान जीवन जिया। नेहरू, पटेल और अंबेडकर जैसे नेताओं ने गांधी के इन कार्यों की निंदा नहीं की, लेकिन उनके व्यक्तिगत आचरण को अस्वीकार कर दिया।

इन तीन महिलाओं के साथ भावनात्मक संबंध बनाए

गांधी की हत्या के बाद, मनु को गुजरात के दूरस्थ इलाके में भेज दिया गया, जबकि सुशीला चुप रहीं। सबसे दुख की बात ये है कि गांधी के इन प्रयोगों में शामिल अधिकांश महिलाओं का वैवाहिक जीवन नष्ट हो गया। गांधी ने पत्रों के माध्यम से सरला देवी, मिशनरी एस्तेर फेयरिंग और मेडेलीन स्लेड (जिन्हें उन्होंने मीराबेन कहा) जैसी महिलाओं के साथ भावनात्मक संबंध बनाए, जो सामान्य आध्यात्मिक संबंधों से परे थे।

सरदार पटेल ने गाँधी जी के आचरण से बना ली थी दूरी 

ब्रिटिश इतिहासकार मानते हैं कि गांधी के ब्रह्मचर्य के कारण जवाहरलाल नेहरू उन्हें अप्राकृतिक और असामान्य मानते थे और सरदार पटेल जैसे नेताओं ने उनके व्यवहार के कारण उनसे दूरी बना ली थी।

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