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महाराष्ट्र में ‘माँ-बहन की गाली दी तो देना होगा जुर्माना, लागू हुआ एक सख्त नियम 

Maharashtra Gram Panchayat : महाराष्ट्र में माँ-बहन की गाली देने पर बैन लग गया है। अहिल्यानगर जिले के कोलगांव गांव ने महिलाओं के सम्मान को बढ़ावा देने और गाली-गलौच की आदत को बदलने के उद्देश्य से एक अनूठा कदम उठाया है। इस छोटे से गांव ने यह तय किया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी की मां या बहन के लिए अपशब्द कहता है, तो उसे 500 रुपये का जुर्माना देना होगा।

महाराष्ट्र के इस गाँव में अनूठा नियम लागू 

महाराष्ट्र में यह अनूठा फैसला ग्राम पंचायत द्वारा लिया गया है।  जिसके तहत अब गांव में ये नियम लागू हुआ है कि अगर कोई माँ-बहन की गाली देगा तो उसे जुर्माना देना होगा। पंचायत के इस फैसले के बाद बातचीत की भाषा में सुधार की उम्मीद जगी है। जैसे ही यह खबर सामने आई, प्रभावित लोग और गांववासी दोनों ही इस पर चर्चा में मशगूल हो गए हैं।

महिला दिवस पर पंचायत ने बनाया नियम 

यह पहल 8 मार्च, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित महिला ग्राम सभा में शुरू हुई। स्व-सहायता समूह की सदस्य पूजा जगताप ने इस मुद्दे को उठाया, उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान तो बातों में होता है, लेकिन रोजमर्रा की बातचीत में मां-बहन के नाम पर गाली-गलौच आम बात हो गई है। ग्राम पंचायत ने लंबी चर्चा के बाद इस नियम को लागू करने का फैसला लिया।

ग्राम पंचायत ने कुछ शर्ते भी रखी 

वहीं, इसे सही ढंग से लागू करने के लिए पंचायत ने सख्त शर्तें भी रखी हैं। जुर्माना तभी वसूला जाएगा जब शिकायतकर्ता अपने पास ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग का डिजिटल प्रमाण प्रस्तुत करेगा। बिना सबूत के कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे प्राप्त धनराशि गांव के विकास कार्यों में खर्च की जाएगी, जैसे कि सम्मानजनक भाषा के प्रचार के लिए बैनर और पोस्टर लगवाना।

कौन-सा है गाँव?

महाराष्ट्र में कोलगांव, जो श्रीगोंडा तालुका में स्थित है, अपने छोटे से आकार और विविधता के लिए जाना जाता है। यहां लगभग नौ हजार लोग रहते हैं, जो विभिन्न जातियों और धर्मों के हैं और मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हैं। इस नई नीति को महिलाओं की गरिमा को सुरक्षित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। 

कुछ पहले ही ग्रामवासी जुर्माना चुका चुके हैं, जिनमें एक पंचायत सदस्य भी शामिल हैं। गांव के लोग मानते हैं कि अब गुस्से में भी लोगों को अपनी जुबान संभालनी पड़ेगी, और यह बदलाव गांव में सकारात्मक माहौल बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण शुरुआत है।

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