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Maghi Purnima In Pushya Nakshatra 2026 : पुष्य नक्षत्र व 7 दुर्लभ योगों का संगम,जानें स्नान का शुभ मुहूर्त एवं विशेष तथ्य

Maghi Purnima In Pushya Nakshatra 2026 : पुष्य नक्षत्र व 7 दुर्लभ योगों का संगम,जानें स्नान का शुभ मुहूर्त एवं विशेष तथ्य-माघ मास की पूर्णिमा, जिसे माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी तिथि मानी जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व 1 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस बार यह तिथि और भी विशेष हो गई है, क्योंकि इसमें एक साथ सात शुभ योग और पुष्य नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार, यह संयोग 1 फरवरी की भोर से लेकर 2 फरवरी की भोर तक रहेगा, जिससे इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजन का फल अनेक गुना बढ़ जाता है। इस बार माघी पूर्णिमा इस बार 2026, 1 फरवरी को पुष्य नक्षत्र के साथ 7 दुर्लभ योगों का संयोग बन रहा है। लेख में जानें स्नान के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, क्या करें और क्या न करें, ताकि मिले पुण्यफल और पापों से मुक्ति।

माघी पूर्णिमा की तिथि और समय

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य गोविंदाचार्य जी के अनुसार के अनुसार पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ-1 फरवरी, सुबह 05:19 बजे से होगा जबकि पूर्णिमा तिथि का समापन -2 फरवरी, सुबह 03:46 बजे उदय तिथि के अनुसार होगा अतः -1 फरवरी का दिन स्नान के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

स्नान के विशेष शुभ मुहूर्त

विशेष यह की इस दिन तीन प्रमुख मुहूर्तों में स्नान करना विशेष लाभकारी रहेगा जिसमें-

ब्रह्म मुहूर्त-1 फरवरी, प्रातः 05:24 बजे से 06:18 बजे तक।

रवि पुष्य योग- प्रातः 07:09 बजे से रात्रि 11:58 बजे तक।
मीन लग्न मुहूर्त- प्रातः 08:46 बजे से 10:15 बजे तक।
धार्मिक कर्मकांडियों की सलाह- गंगा, यमुना, संगम (प्रयागराज) या किसी अन्य पवित्र नदी/जलाशय में स्नान करना सर्वोत्तम है। यदि संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल या तिल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद जल में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए।

इस दिन के 7 दुर्लभ योग-

इस दिन एक साथ बनने वाले सात शुभ योग हैं-प्रीति योग,रवि योग,सर्वार्थसिद्धि योग,रवि आयुष्मान योग,श्रीवत्स योग
और उत्तम योग इस समस्त योगों का अत्यंत लाभकारी योग है जिसमें नामों के अनुसार ही सभी योग फलदाई होंगें।

पुष्य नक्षत्र योग (सर्वाधिक महत्वपूर्ण)

यह संयोग मनोकामनाओं की पूर्ति, आरोग्य लाभ, धन-समृद्धि और पापों के नाश में सहायक माना गया है। माघी पूर्णिमा पर क्या करें ? स्नान व दान-ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने का विशेष महत्व है। तिल, गुड़, वस्त्र, अनाज, फल या घी का दान करें। पूजा-आराधना-सूर्यदेव और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें। पीले फूल, गुड़ या खीर का भोग लगाएं। मंत्र जाप-गायत्री मंत्र, विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें। सत्संग व पाठ- धार्मिक ग्रंथों का पाठ या कीर्तन में समय बिताएं।

माघी पूर्णिमा पर क्या न करें ?

बिना स्नान किए पूजा या दान न करें।
असत्य बोलना, क्रोध करना या किसी का अपमान करने से बचें।
तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन आदि) का सेवन न करें। सात्विक आहार ग्रहण करें।
दान में कंजूसी या दिखावा न करें। श्रद्धा और सच्चे भाव से दान दें।
सूर्यदेव को अर्घ्य देना और विष्णु पूजन न भूलें।

निष्कर्ष-माघी पूर्णिमा 2026 का यह दुर्लभ संयोग आध्यात्मिक ऊर्जा और दैवीय कृपा प्राप्ति का अनमोल अवसर लेकर आया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान,सूर्यार्घ्य, दान और भगवान विष्णु की उपासना करके व्यक्ति अपने जीवन के पापों का नाश कर सकता है तथा मोक्ष के पथ पर आगे बढ़ सकता है। श्रद्धा और साधना के साथ इस पावन दिन का लाभ उठाएं।

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