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मध्यप्रदेश की पहली महिला एमबीबीएस डॉक्टर, 39 पुरुष छात्रों के बीच लिया था अकेला एडमीशन

एमबीबीएस। चिकित्सा के क्षेत्र में आज महिलाओं का आकंडा काफी आगे है, लेकिन 1948 का वह दौर जब मध्यप्रदेश में डॉक्टरी की पढ़ाई करने के लिए डॉ. भक्ति यादव एकलौती स्टूडेंट थी, जिन्होने इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में एडमीशन लिया था और वे एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी, जबकि उनके क्लास में 39 पुरुष छात्र उनके साथ पढ़ाई कर रहे थें। वह मध्य प्रदेश से एमबीबीएस करने वाली पहली छात्रा बनीं और बाद में गाइनेकोलॉजी (स्त्री रोग) में एमएस की डिग्री हासिल की।

समाज सेवा के रूप में की डॉक्टरी

मध्यप्रदेश की पहली महिला डॉक्टर भक्ति यादव ने डॉक्टरी को पेशा नही बल्कि समाज सेवा के रूप में ताउम्र काम की थी। उन्होने अपना जीवन मिल मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं के इलाज के लिए समर्पित कर दिया था। 91 साल की आयु तक उन्होने डॉक्टरी करते हुए मरीजों की देख भाल में लगी रही।

उज्जैन की रहने वाली थी भक्ति यादव

डॉक्टर भक्ति यादव का जन्म 3 अप्रैल 1926 को उज्जैन के महिदपुर में हुआ था। उस दौर में जब लड़कियों की शिक्षा एक चुनौती थी, उन्होंने न केवल पढ़ाई की बल्कि डॉक्टरी की पढ़ाई करने के लिए अकेले सामने आ गई और वे इंदौर के कॉलेज में पढ़ाई की शुरूआत करते हुए चिकित्सा विशेषज्ञ बनी थी।

पद्मश्री से सम्मानित थी डॉक्टर भक्ति

डॉक्टर भक्ति यादव की मरीजों के प्रति भक्ति भाव को देखते हुए सरकार ने उन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया था। उन्होने 91 वर्ष की आयु तक मरीजों की सेवा की थी। उन्होने एक लाख से ज्यादा प्रसव एवं गायनिक ऑपरेशन किए थें। 2017 में डॉक्टर भक्ति यादव ने अंतिम सांसे ली थी।

प्रमुख तथ्य:

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