भोपाल: मध्य प्रदेश के रेलवे स्टेशनों पर अकेले और बेसहारा लोगों की मदद के लिए राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने जुलाई महीने में विशेष अभियान चलाया. एक महीने तक चले इस अभियान में भोपाल, इंदौर और जबलपुर रेलवे इकाइयों ने स्टेशन परिसरों में ऐसे 2,057 लोगों की पहचान की, जिन्हें सहायता और संरक्षण की जरूरत थी.
यह अभियान एडीजी रेलवे राजा बाबू सिंह के निर्देश पर 1 जुलाई से 31 जुलाई तक संचालित किया गया. अभियान के दौरान पुलिस ने जरूरतमंदों की पहचान करने के साथ उनकी काउंसलिंग की और बिछड़े हुए लोगों को उनके परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास किया.
2,057 लोगों में पुरुषों की संख्या सबसे ज्यादा
GRP के आंकड़ों के अनुसार, अभियान के दौरान मिले 2,057 लोगों में 1,556 पुरुष, 404 महिलाएं, 56 लड़के, 39 लड़कियां और 2 ट्रांसजेंडर शामिल थे.
पुलिस की पहल से 159 लोगों को उनके परिजनों से दोबारा मिलाया गया. वहीं, ऐसे 39 लोगों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया गया, जिन्हें तत्काल देखभाल की जरूरत थी. उन्हें शेल्टर होम या नाइट शेल्टर में पहुंचाया गया, जहां उनके रहने और भोजन की व्यवस्था की जा सके.
काउंसलिंग के साथ परिवार से मिलाने की कोशिश
अभियान का उद्देश्य केवल स्टेशन पर घूम रहे लोगों की पहचान करना नहीं था. जीआरपी ने ऐसे लोगों से बातचीत कर उनकी स्थिति समझने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया.
अभियान के दौरान कुछ नाबालिग ऐसे भी मिले, जो अपने परिवार से अलग हो गए थे या किसी घटना के कारण घर से दूर पहुंच गए थे. पुलिस ने उनकी पहचान और परिजनों की तलाश के बाद उन्हें सुरक्षित परिवार तक पहुंचाने की कार्रवाई की.
पीपुल्स यूनिवर्सिटी में हुआ समापन कार्यक्रम
‘ऑपरेशन हमदर्द’ नाम से चलाए गए इस अभियान के समापन पर शुक्रवार को भोपाल स्थित पीपुल्स यूनिवर्सिटी के सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें भोपाल की मेयर मालती राय, पुलिस कमिश्नर संजय कुमार, विश्वविद्यालय के कुलपति हरीश राव, एसपी रेल इंदौर यशपाल सिंह राजपूत, एसपी रेल भोपाल अंकित जायसवाल और वक्ता डॉ. रोहित त्रिवेदी सहित अन्य अधिकारी और अतिथि मौजूद रहे.
अभियान के जरिए रेलवे परिसरों में अकेले और जरूरतमंद लोगों की पहचान कर उन्हें सहायता देने के साथ परिवार से बिछड़े लोगों को दोबारा उनके अपनों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया.

