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मध्य प्रदेश- शादी के महज सात दिन बाद तलाक, वजह जानकर हर कोई चौक गया

इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर की कोर्ट में एक तलाक का मामला तब चर्चा में आ गया, जब विवाह के महज 7 दिन में पति-पत्नी की दायर याचिका पर कोर्ट ने उन्हे तलाक की मंजूरी दे दिया और वे दोनों हसी-खुशी अपने-अपने घर चले गए। इस तलाक में पति-पत्नी की आपसी सहमति थी। दरअसल गांव से जबरदस्ती शादी करके आई पत्नी ने पति के साथ रहने से इनकार कर दिया। उसने कहा, यह शादी मेरी मर्जी से नहीं हुई थी। घरवालों के दबाव में जबरदस्ती मेरी शादी कराई गई। अब मैं पति के साथ नहीं रहना चाहती। मैं किसी और से प्यार करती हूं।

पति-पत्नी पहुचे न्यायालय

पत्नी की बातें सुनने के बाद पहले तो पति चौक गया, क्योकि जिन सपनों के साथ वह शादी करके उसे घर लाया था। वह सपने पल भर में चूर-चूर हो गए, बहरहाल पति ने तलाक लेने का फैसला किया। पत्नी भी इसके लिए तैयार थी। दोनों ने परिवार न्यायालय में आपसी सहमति से तलाक के लिए आवेदन प्रस्तुत किया और सात दिनों के भीतर ही उनका तलाक हो गया।

हिन्दू कानून भी नही आया आड़े

पति-पत्नी के तलाक को लेकर इंदौर जिला कोर्ट में यह सवाल उठा कि क्या हिंदू विवाह अधिनियम के तहत एक वर्ष तक अलग-अलग रहने की शर्त पूरी नहीं होने के कारण तलाक की याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं? जिस पर वकील ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 14(2) के तहत आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णयों में स्पष्ट किया है कि जिस विवाह का वास्तविक अस्तित्व ही न हो, उसमें दोनों पक्षों को जबरदस्ती साथ रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। दोनों पक्षों का समय और जीवन प्रभावित न हो, इसलिए उन्हें आपसी सहमति से अलग कर देना ही उचित होगा। इस दलील के आधार पर विवाह के महज 7 दिन में ही तलाक हो गया और पति-पत्नी अलग हो गए।

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