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मेड-इन-इंडियाः 7 अगस्त स्वदेशी आंदोलन की दिलाता है याद

हथकरघा दिवस। 7 अगस्त का दिन भारत में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में बेहद खास माना जाता है, क्योंकि यह दिन 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाता है। इस दिन देश के पारंपरिक बुनकरों को सम्मानित किया जाता है और स्वदेशी आंदोलन की ऐतिहासिक शुरुआत को याद किया जाता है। जो इतिहास है उसके तहत देश में आज के दिन ही स्वदेशी का नारा बुलंद हुआ और तकरीबन सवा सौ साल पहले देश के लोगो ने यह तय किया था कि वे भारत देश एवं स्थानिय कारीगरों एवं बुनकरों के द्वारा तैयार कपड़े एवं सामानों का इस्तेमाल करेगे।

देश और देशी की सोच

मेड-इन-इंडिया को साकार करने वाला यह निणर्य सवा सौ साल पहले ही भारत के लोगो में जागृत हो गया था। 1905 में देश वासियों की जागरूकता ही कही जाऐगी कि उन्होने देश और देशी सोच के प्रति समर्पित होकर एक जुट होने लगे और यहां के लोगों ने एक निणर्य लिया कि वे भारत देश में जो भी सामान बन रहे है, वे इसे अपनाऐगे, जबकि विदेशी सामानों का बहिष्कार करेगे। जिसका परिणाम 1905 में स्वदेशी आंदोलन शुरूआत हो गई। इससे देश के बुनकरों को काम मिलने लगा तो देश का कच्चा सामान का उपयोग शुरू हो गया।

पीएम मोदी ने कहा, भारत के लिए बड़ा कदम

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज का यह दिन स्वदेशी आंदोलन को याद दिलाता है। उनहोने कहा कि हैंडलूम अपनाना बुनकर परिवारों के सम्मान और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है।

कलकत्ता में आंदोलन की हुई थी शुरूआत

दरअसल 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन की घोषणा हुई थी। यही वजह है कि इस ऐतिहासिक दिन की याद में सरकार ने हथकरघा दिवस के लिए चुना। भारत सरकार ने पहली बार 7 अगस्त 2015 को यह दिवस मनाने की शुरुआत की थी। देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कुशल कारीगरों और बुनकरों के कला कौशल को पहचान दिलाना इसका मुख्य उद्देश्य है। यह दिन वोकल फॉर लोकल और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का संदेश देता है।

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