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सावन के पहले सोमवार को मध्यप्रदेश के इन शिवालयों में हर-हर महादेवा, भक्तों की लंबी कतार

सावन सोमवार। 3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार पड़ रहा है। ऐसे में मध्यप्रदेश के शिव ज्योतिर्लिंगों में अल सुबह से ही हर-हर महादेवा के नारे गूंजेगे। मंदिर प्रबंधन ने भी इसके लिए तैयारी कर रखी है। जिससे पूजा-अर्चना के लिए पहुचने वाले भक्तों को पूजा किसी भी तरह का व्यवधान न आ सकें। सावन के पवित्र महीने में मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन), ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (खंडवा), भोजेश्वर मंदिर (भोजपुर), जटाशंकर महादेव (पचमढ़ी), और रीवा के पास सतना स्थित गैवीनाथ धाम (बिरसिंहपुर), जैसे प्रमुख शिव मंदिरों में भक्तों की विशेष भीड़ और पूजा-अर्चना होती है।

सावन में शिव पूजा का ऐसा है बड़ा महत्वं

सावन का महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय है। इस दौरान शिव पूजा करने से मन की शांति, पापों से मुक्ति और मनचाहा वरदान मिलता है। मान्यता है कि इस पावन मास में माता पार्वती ने शिव जी को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। पौराणिक और धार्मिक जो उल्लेख है उसके तहत सावन में समुद्र मंथन हुआ था। शिव जी ने हलाहल विष पीकर संसार की रक्षा की थी। उस विष की गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने उनका जल से अभिषेक किया था।
माना जाता है कि इस माह शिव जी अपनी ससुराल आते हैं। भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाते हैं। रोज़ पूजा करने से घर में सुख और शांति आती है। सोमवार के व्रत और रुद्राभिषेक से कुंडली के बुरे ग्रह शांत होते हैं। सच्चे मन से की गई आराधना से भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं।

ऐसी है इनकी महिमा

महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन- यह देश के 12 प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहाँ बाबा महाकाल की भस्म आरती बहुत प्रसिद्ध है। यह शिप्रा नदी के किनारे बसा है।
ओंकारेश्वर मंदिर, खंडवा- यह नर्मदा नदी के बीच एक द्वीप पर स्थित दूसरा ज्योतिर्लिंग है। यहाँ का प्राकृतिक द्वीप श्ॐश् के आकार का है।
भोजेश्वर मंदिर, भोजपुर- भोपाल से लगभग 28 किमी दूर स्थित इस मंदिर में एक ही पत्थर से बना दुनिया का सबसे बड़ा और ऊंचा शिवलिंग है। इसका निर्माण 11वीं सदी में राजा भोज ने कराया था।
पशुपतिनाथ मंदिर, मंदसौर- यह बेतवा या शिवना नदी के पास है और अपने आठ मुख वाले अनोखे शिवलिंग के लिए जाना जाता है।
कचनार शिव मंदिर, जबलपुर- यहाँ सफेद संगमरमर से बनी भगवान शिव की 76 फीट ऊंची मूर्ति एक गुफा के ऊपर स्थापित है।
गैवीनाथ धाम, सतना- विंध्य क्षेत्र के बिरसिंहपुर में स्थित यह मंदिर खंडित स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ सावन में चारों तरफ से श्रद्धालु जल चढ़ाने आते हैं।
जटाशंकर महादेव, पचमढ़ी- प्राकृतिक गुफाओं और पहाड़ों के बीच स्थित इस पवित्र स्थल पर सावन मास में विशेष प्राकृतिक अभिषेक और पूजन का महत्व है।

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