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Live in Relationship : बिना शादी के पति-पत्नी माने जाएंगे लिव-इन कपल, बस करना होगा ये काम 

Live in Relationship : ‘बिना फेरे हम तेरे’ ये कहावत जनगणना की रिपोर्ट के लिए सही बैठती है। दरअसल, अगर कोई व्यक्ति खुद को ‘स्थिर संबंध’ में मानता है, तो उसे जनगणना 2027 के नए FAQ में शादीशुदा के रूप में गिना जाएगा। यह निर्णय न केवल एक तकनीकी बदलाव है, बल्कि समाज की बदलती सोच और जीवनशैली का भी प्रतीक है। अब इस रिपोर्ट को लेकर बहस भी शुरू हो गई है कि क्या बिना शादी के ऐसे रिश्तों को शादी के बराबर मानना सही है या इससे पारंपरिक मूल्यों पर असर पड़ेगा।  

क्या कहती है जनगणना की रिपोर्ट?

अब जनगणना की इस रिपोर्ट को लेकर बहस तेज हो गई है कि क्या बिना पारंपरिक शादी के इन संबंधों को वैध मानना सही है या नहीं। कई लोग मानते हैं कि इससे समाज में बदलाव आ रहा है और रिश्तों की परिभाषा भी विकसित हो रही है। हालांकि, सरकार का यह कदम उन लोगों के लिए राहत की बात है जो लंबे समय से लिव-इन में रह रहे हैं, लेकिन सामाजिक या कानूनी मान्यता के अभाव में कई सुविधाओं से वंचित रहते थे। 

क्या है ‘स्थिर रिश्ता’ की परिभाषा?

इसके साथ ही, सवाल उठता है कि ‘स्थिर रिश्ता’ की परिभाषा क्या होगी और इसे कैसे प्रमाणित किया जाएगा? जिससे इसका दुरुपयोग न हो। जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले भी यदि कोई अविवाहित कपल अपने आप को मैरिड बताता था, तो उसकी जानकारी उसी आधार पर दर्ज की जाती थी।

कैसे पता करेंगे कि रिश्ता स्थिर है या नहीं,?

अब, हाउस लिस्टिंग फेज में यह सवाल भी शामिल किया गया है कि घर में रहने वाले शादीशुदा कपल की संख्या कितनी है।  यह प्रक्रिया कुल 45 दिनों तक चलेगी, जिसमें पहले 15 दिन सेल्फ-एन्यूमरेशन यानी आत्म-घोषणा का चरण होगा और उसके बाद 30 दिन एन्यूमरेटर के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा।  

‘स्थिर संबंध’ का दावा कपल कैसे करें?

इस नई व्यवस्था में, 15 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध पोर्टल पर, कोई भी जिम्मेदार वयस्क OTP के जरिए लॉग इन कर अपने परिवार की जानकारी भर सकता है। खास बात यह है कि इसमें ‘स्थिर संबंध’ का दावा करने वाले व्यक्ति को इसके लिए किसी भी तरह का कानूनी दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। जानकारी केवल व्यक्ति के ‘ज्ञान और विश्वास’ के आधार पर दर्ज की जाएगी।  

यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी और इसमें घर की लोकेशन को जियो-टैग करना भी अनिवार्य होगा, ताकि डेटा अधिक सटीक और व्यवस्थित तरीके से एकत्र किया जा सके।  

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