Aatm Manthan :ज़िंदगी हर घड़ी बदल जाती है कभी डराती है तो कभी ख़ुशी देती है लेकिन ये सच है कि समय कोई भी हो ,जो आज है वो कल नहीं होगा ,होंगीं तो सिर्फ यादें हमारे साथ उन बीते हुए लम्हों की और अगर ये यादें खूबसूरत हैं तो हमारी ज़िंदगी का इससे बेहतर सरमाया नहीं हो सकता तो क्यों मन को कल की चिंताओं में कहीं भटकने दें, क्यों न आज में जिएँ ,आज को सजाएँ ,आज को सँवारें या इसे खूबसूरत बनाने की कोशिश करें।
ज़िंदगी का पूरा मज़ा कैसे लें :-
अब सवाल ये उठता है कि अगर हम ये सोच लें की हर लम्हा पलक झपकते हमारे हाँथों से फिसल जाएगा तो हम इसका मज़ा कैसे ले पाएँगे इससे ! तो इसका जवाब ये है कि अगर हम ज़िंदगी का हर लम्हा ऐसे जियें, जैसे ये आख़री हो तो शायद हम ज़िंदगी का पूरा मज़ा ले पाएँगें खुल के आज में जी पाएँगे।
ज़्यादा ख़ुशी या दुख दोनों क्यों हैं बुरे :–
जो हमारे साथ हो रहा है अच्छा या बुरा वो ज़िंदगी का बेशक़ीमती सबक़ है जो उसने हमारे नाम किया है इसलिए उससे इतना दुखी होने की ज़रूरत नहीं है कि हम फिर आगे न बढ़ पाएँ या इतना खुश होने की भी ज़रूरत नहीं होती कि हम खुद पर ही इतराने लगें क्योंकि ज़्यादा ख़ुशी और ग़म की दोनों सूरतों में हम आगे का सफर आसानी से तय नहीं कर पाते, जहाँ है वहीं रूक जाते हैं।
किसी से नाराज़ क्यों न हों :-
ये तो तय है कि ख़ुशी-ख़ुशी ज़िंदगी नहीं बीतती ग़म तो मिलते ही हैं जिनमें कभी हम ज़िंदगी से नाराज़ होते हैं कभी दूसरों से तो कभी खुद से पर अगर हम हर हाल में ज़िंदगी का मज़ा लेना चाहते हैं तो बेहतरी इसी में है कि हम ज़्यादा देर तक किसी से नाराज़ न रहें हर किसी को माफ़ करना सीखें और अपनी ज़िंदगी से भी क्या ख़फ़ा होना आखिर उसने हमें हसीन पल भी तो दिए हैं ,फिर ज़िंदगी के दो पहलू ही तो हैं ख़ुशी और ग़म ज़िंदगी है तो इन दोनों का आना तो निश्चित ही है।
कैसे संभालें ख़ुशी और ग़म :-
ज़िंदगी को बार – दोहराने की आदत नहीं, जो उसने एक बार दे दिया वो दोबारा नहीं देगी कुछ पहले से बुरा होगा तो कुछ पहले से भला पर हाँ यादें ज़रूर होंगीं उन बीते हुए पलों की और उस याद को इतना खुश शक्ल बनाना हमारे हाँथ में है कि वो जब दुबारा हमें याद आए तो हमें ख़ुशी दे न दे पर पहले जितना रुलाए न, उसमें कोई अफ़सोस न छुपा हो और इसके लिए ज़रूरी है कि ज़िंदगी जो भी हमारे दामन में डाले, हम उसे मन से स्वीकार करें और बस अपना फ़र्ज़ निभाएँ। ग़ौर ज़रूर करिएगा इस बात पर फिर मिलेंगें आत्म मंथन की अगली कड़ी में धन्यवाद।

