Lecture on ‘Bharat Bodh’ at APS University Rewa: महाकौशल विचार मंच (प्रज्ञा प्रवाह) एवं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के संयुक्त तत्वाधान में ‘भारत बोध’ विषय पर एक गरिमामयी विद्वत व्याख्यान का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करना था।
कुरीतियों का खंडन और सांस्कृतिक गौरव
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय सह संयोजक विनय जी दीक्षित ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति की गहराई को रेखांकित किया। उन्होंने राजा शिवी और बहेलिये के पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से त्याग और शरणागत की रक्षा जैसे मूल्यों को समझाया। श्री दीक्षित ने समाज में प्रचलित कुछ भ्रामक कहावतों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि ‘बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपइया’ जैसी कहावतें भारतीय दर्शन को नीचा दिखाने का प्रयास हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी संस्कृति में रिश्तों की अहमियत भौतिक धन से कहीं अधिक है और भारतीय दर्शन में पिता व बड़े भाई को ईश्वर तुल्य माना गया है, जिनके समक्ष धन की कोई महत्ता नहीं है।
भारतीय परंपरा की महानता और उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार कुड़रिया ने भी अपने उद्बोधन में भारतीय दर्शन और संस्कृति की विशिष्टताओं एवं महानता पर प्रकाश डाला। इस महत्वपूर्ण अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीरजा नामदेव सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, छात्र-छात्राएं और क्षेत्र के गणमान्य बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। अंततः, इस आयोजन को भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय चेतना को नई पीढ़ी के भीतर मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।

