MP Promotion News In Hindi | मध्यप्रदेश की हाईकोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण की नई पॉलिसी को लेकर सुनवाई हो रही है। मंगलवार को राज्य सरकार ने इस मामले में अपना जवाब कोर्ट में पेश किया है. सरकार ने अपनी पुरानी और नई प्रमोशन पॉलिसी की विस्तार से जानकारी देते हुए इसमें अंतर बताया है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा जवाब अधूरा और असंगत
सरकार की ओर से प्रमोशन को लेकर जो जबाब पेश किया गया, उस पर याचिकाकर्ताओं ने सरकार के जवाब को अधूरा और असंगत बताया है।
उनका कहना है कि सरकार ने क्रीमी लेयर और क्वांटिफायबल डेटा के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है. ये दोनों बातें प्रमोशन में आरक्षण को लेकर बहुत महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे में हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 सितंबर की डेट तय की है। जिससे दोनों ही पक्ष सटीक जानकारी कोर्ट में पेश कर सकें।
2016 से पदोन्नतियां है बंद
ज्ञात हो कि प्रदेश में न्यायालयीन मामलों को छोड़कर 2016 से पदोन्नतियां बंद हैं। इस अवधि में हाजारों कर्मचारी रिटार्यड हो गए, तो कर्मचारी सरकार से लगातार पदोन्नति की मांग कर रहे थें।
जिस पर मोहन सरकार ने सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करके पदोन्नति नियम 2025 तैयार किए लेकिन इस नियम को सामान्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था (सपाक्स) की ओर से हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
जिसमें कोर्ट ने सरकार से जबाब मांगा था कि पुराने और नए प्रमोशन में आरक्षण के निमय में क्या अंतर है। सरकार के जबाब पर याचिकाकर्त्ता को अपत्ति थी, जिसके चलते कोर्ट ने दोनों पक्षों को समय देते हुए सुनवाई की डेट आगे बढ़ाई है।
