MP: कूनो में चीतों पर भारी खर्च, एक साल में खा गए 1.27 करोड़ रुपये के बकरे

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Kuno Cheetah Project: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जहां वर्तमान में 38 चीते हैं और उनके भोजन पर भारी खर्च हो रहा है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में 32 चीतों ने 1.27 करोड़ रुपये से अधिक का बकरी का मांस खा लिया, जिसका औसत रोजाना लगभग 35,000 रुपये आता है। इसी बीच, बोत्सवाना से 8 नए चीते (6 मादा और 2 नर) शनिवार (28 फरवरी 2026) को कूनो पहुंचने वाले हैं, जो प्रोजेक्ट चीता को और मजबूती देंगे।

Kuno Cheetah Project: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनके भोजन पर सरकारी खर्च को लेकर विधानसभा में सवाल उठे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में चीतों को खिलाए गए बकरे के मीट पर 1 करोड़ 27 लाख 10 हजार 870 रुपये खर्च हुए हैं, जो औसतन प्रतिदिन करीब 35,000 रुपये बनता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।

चीतों के भोजन पर खर्च और संख्या की जानकारी

विधायक मुकेश मल्होत्रा ने पूछा था कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के भोजन पर एक साल में कितनी राशि खर्च हुई, एक दिन में कितने बकरे खिलाए जाते हैं, और चीतों की कुल संख्या क्या है। साथ ही, क्या 17 दिसंबर 2022 से एक वर्ष में बकरा क्रय के लिए 1 करोड़ 30 लाख रुपये दिए जा रहे हैं?

मुख्यमंत्री ने जवाब में बताया कि चीतों के भोजन के लिए अलग से कोई बजट नहीं है। चिकित्सीय देखभाल और प्रबंधन की योजनाओं से ही बकरा मीट खरीदा जाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में मीट खरीद पर कुल 1,27,10,870 रुपये खर्च हुए। एक दिन में कितने बकरे खिलाए जाते हैं, इसका कोई निर्धारित मानक नहीं है.आवश्यकता अनुसार मीट उपलब्ध कराया जाता है। कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान में 32 चीते मौजूद हैं (हाल के जन्मों को मिलाकर कुल संख्या में थोड़ी वृद्धि संभव)।

चीते गांवों में पहुंचकर मवेशी का शिकार कर रहे

विधायक ने यह भी पूछा कि ग्वालियर, शिवपुरी, मुरैना और राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में घूम रहे चीतों के कारण ग्रामीणों की बकरी-मवेशी का शिकार हो रहा है? साथ ही, दिसंबर 2025 में घाटीगांव हाइवे पर सड़क दुर्घटना में एक चीते की मौत के पीछे क्या भोजन की कमी थी? जवाब में बताया गया कि कूनो के खुले जंगल में विचरण करने वाले चीते कभी-कभी वन क्षेत्र की सीमा से बाहर निकल जाते हैं और ग्रामीणों के मवेशी का शिकार कर लेते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क दुर्घटना के कारण एक चीते की मौत हुई।

प्रोजेक्ट चीता की सफलता और नई खेप

मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट चीता के तहत 2022 में नामीबिया से 8 चीते और 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे। अब प्रदेश में चीतों की आबादी बढ़कर 32 (और हाल के शावकों सहित अधिक) हो गई है। भारतीय मिट्टी पर कई शावकों का जन्म भी हुआ है।शनिवार को बोत्सवाना से 8 नए चीते (6 मादा और 2 नर) कूनो पहुंचने वाले हैं। ये विशेष विमान से ग्वालियर हवाई अड्डे पर उतरेंगे, जहां से हेलीकॉप्टर या विशेष वाहनों द्वारा कूनो ले जाए जाएंगे। केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री मोहन यादव मौजूद रह सकते हैं।

इन चीतों को पहले विशेष क्वारंटीन बाड़ों में एक महीने तक रखा जाएगा, ताकि स्वास्थ्य जांच और पर्यावरण अनुकूलन हो सके। क्वारंटीन के बाद इन्हें गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य (वर्तमान में 3 चीते) या नौरादेही अभयारण्य में शिफ्ट करने की संभावना है। इस खेप के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या 46 के करीब पहुंच सकती है।

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