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झूला में विराजमान हुए कृष्ण और राधा रानी, 15 दिन का झूला महोत्सव शुरू

रीवा। सावन महीने में झूला महोत्सव की वर्षो से चली आ रही परपंरा आज भी कायम है। रीवा शहर के ऐतिहासिक लक्ष्मणबाग, किला राधारानी मंदिर, फोर्ट रोड मुकतिक मंदिर, वेंकट रोड संकटमोचन मंदिर समेत अन्य मठ मंदिरों में 15 दिन का झूला महोत्सव शुरू हो गया है। मठ मंदिरों में राधा रानी और कृष्ण को झूले में विराजमान किया गया है। भगवान भक्त भी पहुच कर उन्हे झूला झुला रहे है और इस अवसर का पुण्य लाभ ले रहे है।
पुजारियों के अनुसार सावन के दूसरे पाख में झूला महोत्सव मनाया जाता है। रक्षाबंधन तक भगवान झूले में विराजमान रहते है। इस दौरान सावन गीत, झूला गीत समेत अन्य भजन र्कीतन के आयोजन हो रहे है। जिससे भक्ति, भाव और प्रकृति का एक बेहतर माहौल निर्मित होता है। इतना ही नही पेड़ों की मोटी डालों पर झूला लगा कर न सिर्फ इस झूला के आंनद उठाते है बल्कि गीत संगीत के माध्यम से झूला उत्सव को मनाते है।

प्रकृति के उल्लास, प्रेम और पौराणिक मान्यता

सावन के सुहाने महीने में भगवान (विशेषकर राधा-कृष्ण और शिव-पार्वती) के झूले पर विराजमान होने की परंपरा प्रकृति के उल्लास, प्रेम और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी है। वर्षा ऋतु की हरियाली और ठंडी फुहारों के बीच भगवान को झूला झुलाकर भक्त अपनी आनंदित भावनाएं व्यक्त करते हैं।

पौराणिक और धार्मिक कारण

वैष्णव परंपरा और ब्रज (मथुरा-वृंदावन) में सावन के दौरान झूलन यात्रा मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी सुहाने मौसम में कृष्ण ने राधा रानी के साथ वनों में झूला लीला की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती के लिए सावन में झूला डाला था और उन्हें झूला झुलाया था। यह प्रसंग आपसी प्रेम और आत्मीयता का प्रतीक माना जाता है। सावन में चारों तरफ हरियाली छा जाती है और मौसम सुहाना हो जाता है। इस उल्लासपूर्ण वातावरण में उत्सव मनाने के लिए मंदिरों और घरों में भगवान के सुंदर, फूलों से सजे झूले सजाए जाते हैं।

प्रेम और मधुरता का माध्यम है झूला

सावन के महीने में झूला झूलना धार्मिक, सांस्कृतिक और मानसिक आनंद का प्रतीक है। यह परंपरा प्रकृति के सौंदर्य के प्रति आभार व्यक्त करने और वैवाहिक जीवन में प्रेम व मधुरता बढ़ाने का एक सुंदर माध्यम मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि सावन में पति द्वारा पत्नी को झूला झुलाने से आपसी प्रेम और वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ती है। महिलाएं हरियाली तीज और सावन के दिनों में इकट्ठे होकर कजरी और सावन के पारंपरिक गीत गाती हैं, जिससे मन प्रसन्न होता है। हरियाली के बीच झूला झूलने से मानसिक तनाव दूर होता है और मूड फ्रेश होता है। झूला स्वास्थ की दृष्टी से भी बहुत लाभकारी होता है। झूलने की गति से फेफड़ों, हृदय और मांसपेशियों का हल्का व्यायाम हो जाता है तथा शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है।

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