जाने कितना शक्तिशाली था बलराम का हल, जब उल्ट-पुलट हो गया हस्तीनापुर, विवाह में भी हल आया काम

विशेष। भगवान बलराम का हल एक शक्तिशाली हथियार था, जो उनकी शारीरिक शक्ति और असीम ऊर्जा का प्रतीक था। उन्हे हलधर के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि वे हमेशा अपने हल को धारण करते थे। बलराम के हल की शक्ति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने हल से यमुना नदी को भी दिशा बदलने पर मजबूर कर दिया था। बलराम की शारीरिक शक्ति का कोई मुकाबला नहीं था, और उनका हल उनकी शक्ति का विस्तार था। बलराम अपने हल को आसानी से नियंत्रित करते थे, और इसे विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए इस्तेमाल करते थे, जैसे कि युद्ध, कृषि, और विनाश। बलराम का हल न केवल एक हथियार था, बल्कि कृषि और उर्वरता का भी प्रतीक था बलराम ने अपने हल का उपयोग कई युद्धों में किया, जिसमें उन्होंने अपने दुश्मनों को हराया।

बलराम के हल और उनकी शक्ति की ऐसी है कथाएं

भगवान बलराम के हल और उनकी शक्ति की जो कथाऐ मिलती है। उनमें हस्तीनापुर को लेकर बताया जाता है कि कौरवों के बीच एक बार बलराम का खेल हुआ और बलराम उसमें जीत गए, लेकिन कौरव हारने के लिए तैयार नही थें। जिससे बलराम को गुस्सा आ गया और उन्होने अपने हल से पूरी हस्तीनापुर को खीच कर गंगा नदी में डूबने लगे। इस दौरान आकाशवाणी हुई की जीत बलराम की हुई है। जिस पर बलराम ने अपना हल रख दिया और तभी से उन्हे हलधर कहा जाने लगा।

बहु के लिए लड़ गए थें बलराम

एक कथा यह भी मिलती है कि भगवान कृष्ण की पत्नी जाम्बवती का पुत्र साम्ब और दुर्याधन एवं भानुमती की पुत्री लक्ष्मणा एक दूसरे प्रेम करते थें। दोनों ने गंधर्व विवाह कर लिया और साम्ब लक्ष्मणा को लेकर द्वारिका जा रहे थें। इस बात की जानकारी जब कौरवों को लगी तो उन्होने आक्रमण करके साम्ब को बंदी बना लिए। इस बात की जानकारी बलराम और कृष्ण को जब लगी तो बलराम हस्तीनापुर पहुच गए। उन्होने कौरवों से साम्ब और लक्ष्मणा को मुक्त करने का आग्रह किए, लेकिन कौरवों ने उनकी बात नही सुनी। जिससे नाराज बलराम ने अपने अस्त्र हल का प्रयोग किए और पूरी हस्तीनापुर को खींच कर गंगा में डूबने के लिए लेकर चल दिए। जिससे हस्तीनापुर में हाहाकार मच गया। कौरवों ने बलराम की बात आखिरकार मानी और साम्ब एवं लक्ष्मणा को न सिर्फ मुक्त किए बल्कि सम्मान पूर्वक विदाई किए। द्वारिका में साम्ब लक्ष्मणा का वैदिक रीति रिवाज से विवाह हुआ।

रेवती से विवाह करने के लिए हल का किया था प्रयोग

बलराम के हल की शक्ति को लेकर एक कहानी यह भी पाई जाती है कि बलराम से रेवती कई युग न सिर्फ बड़ी थी बल्कि उनसे कई हाथ लम्बी थी। गर्ग संहिता में इस बात का उल्लेख है कि रेवती के पिता ब्रम्हा जी से मिलने पहुचे और उन्होने अपनी पुत्री रेवती के लिए सुयोग्य वर के लिए प्रार्थना किए। ब्रम्हा ने बताया कि वे धरती पर जाए और शेषा अवतार बलराम उनकी पुत्री के लिए सुयोग वर है। रेवती जब बलराम से मिली तो वह कई फिट लंबी थी। जिस पर बलराम ने अपने हल का प्रयोग किए और रेवती की लंबाई 7 फिट कर दिए। जिसके बाद रेवती और बलराम का विवाह हुआ।

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