जाने कितनी लाभकारी है अटल पेंशन योजना, मोदी सरकार ने 2031 तक बढ़ाई डेट

अटल पेंशन योजना। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरकार की प्रमुख अटल पेंशन योजना (एपीवाई) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, देशभर के असंगठित क्षेत्र के अपने श्रमिक भाई-बहनों के कल्याण के लिए हम प्रतिबद्ध हैं. इसी कड़ी में आज हमारी सरकार ने अटल पेंशन योजना को 2030-31 तक जारी रखने को मंजूरी दी है. इससे निम्न-आय वर्ग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था आय सुरक्षा सुनिश्चित होगी। पीएम मोदी के इस निणर्य का एमपी के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना के तहत लाखों निम्न आय वर्ग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में निर्धारित मासिक आय की महत्वपूर्ण सुविधा मिल रही है। यह जन-कल्याणकारी निर्णय है जिसका बड़े वर्ग को लाभ मिलेगा।

क्या है अटल पेंशन योजना

अटल पेंशन योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पेंशन योजना है, जो मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और गरीबों को 60 साल की उम्र के बाद 1,000 से 5,000 तक की न्यूनतम मासिक पेंशन की गारंटी देती है, जिससे उन्हें बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा मिल सके, जिसके लिए 18-40 वर्ष के बैंक खाताधारक नागरिक मासिक या त्रैमासिक योगदान करते हैं।

जाने कितने जमा करने पड़ते है रूपए

अटल पेंशन योजना में केवल 42 रुपये मासिक जमा करके 60 साल की उम्र में हर महीने 1000 रुपये पेंशन पाई जा सकती है। अगर अधिक योगदान किया जाए तो पेंशन 5000 रुपये तक भी बढ़ सकती है। यह योजना खासतौर पर उन लोगों के लिए है जिनके पास नौकरी में पेंशन नहीं है, ताकि बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो।

ऐसी है अटल पेंशन योजना

लक्ष्य- असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, गरीबों और वंचितों के लिए एक सुरक्षित सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाना।
पात्रता- 18-40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक जिनके पास बैंक खाता है और वे आयकरदाता नहीं हैं।
न्यूनतम गारंटीकृत पेंशन- योगदान के आधार पर 1,000, 2,000, 3,000, 4,000 या 5,000 प्रति माह (60 वर्ष की आयु के बाद)।
सरकारी सह-अंशदान- सरकार उन ग्राहकों को 5 साल तक सह-अंशदान देती है जो अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत कवर नहीं हैं और आयकरदाता नहीं हैं।
पेंशन लाभ- ग्राहक की मृत्यु के बाद, जीवनसाथी को समान पेंशन मिलती है, और दोनों की मृत्यु के बाद, संचित राशि नॉमिनी (नामित व्यक्ति) को मिलती है।
अंशदान- यह एक स्वैच्छिक योजना है और अंशदान की राशि उम्र और पेंशन की चुनी हुई राशि पर निर्भर करती है, जो बैंक खाते से काटी जाती है।

मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी को पेंशन

अटल पेंशन योजना में अभिदाता की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी को आजीवन वही पेंशन मिलती है जो अभिदाता को मिल रही थी (₹1,000-₹5,000), और अभिदाता व जीवनसाथी दोनों की मृत्यु के बाद, संचित पेंशन राशि नामिती को एकमुश्त मिल जाती है, जो 1.7 लाख से 8.5 लाख तक हो सकती है, यह योगदान और अवधि पर निर्भर करता है।

मृत्यु होने पर मिलने वाले लाभ

जीवनसाथी को पेंशन के रूपए- अभिदाता की मृत्यु के बाद, उसके जीवनसाथी को जीवनभर वही मासिक पेंशन मिलती रहेगी जो अभिदाता को मिल रही थी (1,000 से 5,000 के बीच).
नामिती को पेंशन राशि- अभिदाता और उसके जीवनसाथी (दोनों) की मृत्यु के बाद, 60 वर्ष की आयु तक जमा हुई पूरी पेंशन राशि नामिती को एकमुश्त मिलती है। यह राशि योगदान के स्तर के अनुसार अलग-अलग होती है, जैसे 1,000 मासिक पेंशन के लिए लगभग 1.7 लाख और 5,000 मासिक पेंशन के लिए लगभग 8.5 लाख तक हो सकती है।

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