Kidney Infection Reason : आजकल किडनी में संक्रमण की समस्या काफ़ी लोगों को हो रही है। लेकिन वक़्त रहते अगर पहचान कर लिया जाए तो किडनी को संक्रमित होने से बचाया जा सकता है। बस आपको यह ध्यान देना है कि आप दिन भर में कितनी बार पेशाब करते हैं? आप कितनी बार पेशाब करते हैं, ये नोट कर लें, तो आप ये जान सकते हैं कि आपकी किडनी सही है या नहीं।
पेशाब की आदत से समझे किडनी ठीक है या नहीं
किडनी स्वस्थ है या नहीं, ये पता लगाना बहुत आसान है। आप किडनी की स्थिति पेशाब की आदतों को देख कर समझ सकते हैं। हमारी किडनी सही से काम कर रही है या नहीं, यह जानने का सबसे अच्छा तरीका है यूरिन में यूरिया और क्रिएटिनिन की जांच करना। अगर इन दोनों की मात्रा बढ़ जाए, तो यह किडनी की समस्या का संकेत हो सकता है।
किडनी को कमजोर करती है यूरिया
डॉक्टर बताते हैं कि क्रिएटिनिन और यूरिया, दोनों ही चीजें हैं जो किडनी की कार्यक्षमता को कमजोर कर सकती हैं। यूरिया प्रोटीन के टूटने से बनता है और क्रिएटिनिन मांसपेशियों के टूटने से बनता है। इन दोनों का संबंध पेशाब और पानी से है। अगर आप कम पानी पीते हैं, तो शरीर में यूरिया और क्रिएटिनिन बढ़ सकते हैं। इससे पेशाब में इन पदार्थों की मात्रा भी बढ़ जाती है। यूरिया और क्रिएटिनिन हमारी रोज की गतिविधियों से बनते या घटते हैं।
कम पानी पीने से बढ़ती है यूरिया
यूरिया अक्सर कम पानी पीने की वजह से बढ़ता है। एक दिन में इंसान को कम से कम 3 लीटर पानी पीना चाहिए। यदि कोई केवल 1 लीटर पानी पीता है, तो उसका यूरिया स्तर बढ़ सकता है। क्रिएटिनिन मुख्य रूप से मांसपेशियों के टूटने से बढ़ता है। अधिकतर पतले लोग इस समस्या से गुजरते हैं क्योंकि उनकी मांसपेशियां कमजोर होती हैं। डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर भी क्रिएटिनिन बढ़ाने का कारण बन सकते हैं। कभी-कभी किडनी की बीमारी इन कारणों से भी हो सकती है।
एक दिन में कितनी बार पेशाब आना चाहिए?
डॉक्टरों के अनुसार, स्वस्थ व्यक्ति रोजाना 800 मिलीलीटर से 2000 मिलीलीटर तक पेशाब करता है। उसे दिन में 5 से 8 बार पेशाब जाना चाहिए। अगर आप इससे कम पेशाब करते हैं, तो जांच करानी चाहिए। गाढ़ा रंग का पेशाब आना या बहुत अधिक पेशाब होना दोनों ही सही संकेत नहीं हैं। इसके लिए आपको जांच करवानी होगी। अगर आपकी यूरिया रिपोर्ट 7 से 20 mg/dL के बीच है, तो इसका मतलब है कि आपकी किडनियाँ सही काम कर रही हैं। लेकिन अगर यह स्तर इससे ऊपर है, तो इसका मतलब है कि किडनी में समस्या हो सकती है।
किडनी खराब होने के लक्षण
विशेषज्ञ बताते हैं कि उम्र, खानपान, दवाइयां और सेहत के हिसाब से किडनी में समस्या का स्तर थोड़ा अलग हो सकता है। लेकिन अगर ब्लड में यूरिया और क्रिएटिनिन का स्तर बहुत बढ़ा हो, तो यह आपकी आदतों और सेहत पर असर डाल सकता है। यह किडनी की खराबी का भी संकेत हो सकता है। इन दोनों पदार्थों का स्तर बढ़ने से क्रोनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। यह सबसे खतरनाक किडनी की बीमारी है। इस बीमारी के लक्षण हैं जल्दी थक जाना, पेशाब का बहुत अधिक या बहुत कम होना, पैर, टखने या चेहरे पर सूजन, भूख न लगना, उल्टी या मतली, और हाथ-पैर में खुजली होना।
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