Mallikarjun Kharge Swami Vivekananda tribute के तहत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर उन्होंने स्वामी विवेकानंद को भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत और भारतीय मूल्यों का प्रतीक बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने सोशल मीडिया मंच X पर साझा संदेश में कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे। उन्होंने युवाओं को आत्मविकास, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी की ओर प्रेरित करने में स्वामी विवेकानंद की भूमिका को रेखांकित किया।
खड़गे ने यह भी उल्लेख किया कि 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने की परंपरा की शुरुआत Rajiv Gandhi के कार्यकाल में हुई थी। इसका उद्देश्य युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से जोड़ना और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा है।
शिकागो भाषण का ऐतिहासिक संदर्भ
अपने संदेश में खड़गे ने स्वामी विवेकानंद के 1893 में दिए गए शिकागो भाषण का हवाला दिया। इस भाषण में स्वामी विवेकानंद ने सांप्रदायिकता, असहिष्णुता और कट्टरता को मानव समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बताया था। उनके अनुसार, इन प्रवृत्तियों के कारण इतिहास में हिंसा और विभाजन को बढ़ावा मिला।
खड़गे ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का यह संदेश आज के वैश्विक और सामाजिक परिदृश्य में भी प्रासंगिक बना हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संवाद, सहिष्णुता और आपसी सम्मान ही समाज को आगे ले जा सकते हैं।
National Youth Day और Mallikarjun Kharge Swami Vivekananda tribute
राष्ट्रीय युवा दिवस हर वर्ष 12 जनवरी को मनाया जाता है। इस अवसर पर देशभर में युवाओं से जुड़े कार्यक्रम, संगोष्ठियां और शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। Mallikarjun Kharge Swami Vivekananda tribute को भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां स्वामी विवेकानंद के विचारों को समकालीन समाज से जोड़ा गया।

पवन खेड़ा का बयान
इस अवसर पर कांग्रेस नेता Pawan Khera ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्वामी विवेकानंद को “योद्धा संन्यासी” बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में संकीर्ण सोच और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई।
पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि स्वामी विवेकानंद का संदेश सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता पर आधारित था। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के मूल विचारों को समझने और उन्हें व्यवहार में उतारने की अपील की।
स्वामी विवेकानंद का जीवन और योगदान
Swami Vivekananda का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनका पूर्व नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उन्होंने 1897 में Ramakrishna Mission की स्थापना की, जो आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है।
स्वामी विवेकानंद को विश्व स्तर पर पहचान 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में दिए गए उनके भाषण से मिली। इस भाषण ने भारतीय दर्शन और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया।
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