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खड़गे के घर ‘जनमहाभियोग’, ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव; RSS और मोदी-शाह पर भी लगाए आरोप

KHARGE

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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी INDIA ब्लॉक ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली स्थित आवास पर ‘पब्लिक महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया। इसे विपक्ष ने मॉक पार्लियामेंट यानी प्रतीकात्मक संसद का रूप दिया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कार्यवाही की अध्यक्षता की, जबकि खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया।

इस दौरान खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर छह गंभीर आरोप लगाए। इनमें चुनावों को प्रभावित करने की साजिश, 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने, संसद की जानकारी के बिना Form-6 में बदलाव करने, ECINET के जरिए मतदाता सूची पर नियंत्रण करने, अन्य चुनाव आयुक्तों को फैसलों से दूर रखने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करने के आरोप शामिल हैं। ये सभी विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

खड़गे ने गिनाए छह आरोप, बोले- चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

खड़गे ने अपने संबोधन में कहा कि विपक्ष का ज्ञानेश कुमार से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है। उनकी मांग है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम करे और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा हो।

उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। Form-6 में संसद की जानकारी या अनुमति के बिना बदलाव किया गया और ECINET के माध्यम से मतदाता सूचियों का नियंत्रण केंद्रीकृत किया जा रहा है।

खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों को महत्वपूर्ण फैसलों से दूर रखा गया। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों पर काम कर रहे हैं।

RSS पर भी साधा निशाना, पटेल और इंदिरा गांधी को किया याद

खड़गे ने अपने भाषण की शुरुआत सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करते हुए की। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने देश के प्रत्येक वयस्क नागरिक को वोट देने का अधिकार दिया था।

RSS का जिक्र करते हुए खड़गे ने आरोप लगाया कि संगठन ने सार्वभौमिक मताधिकार की अवधारणा पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि अगर देश के सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार नहीं मिला होता, तो भारत में लोकतंत्र और नागरिकों की समान भागीदारी की स्थिति अलग होती।

खड़गे ने संविधान के अनुच्छेद 326 का उल्लेख करते हुए कहा कि वयस्क मताधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और इसकी रक्षा करना जरूरी है।

मोदी सरकार पर चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए गए। उन्होंने चुनावी बॉन्ड, सांसदों को तोड़ने और अब वोट चोरी के आरोपों का जिक्र किया।

खड़गे ने दिसंबर 2023 में पारित मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह कानून चुनाव आयुक्तों को ऐसी कानूनी सुरक्षा देता है, जो राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून उस समय पारित किया गया, जब विपक्ष के 145 सांसदों को संसद से निलंबित किया गया था। खड़गे ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के चुनावों का जिक्र करते हुए मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

SIR पर बोले- मृतकों के नाम हटाइए, लेकिन आंकड़े भी दीजिए

खड़गे ने SIR का बचाव करते हुए कहा कि विपक्ष मृत मतदाताओं या अपात्र लोगों के नाम वोटर लिस्ट में बनाए रखने की मांग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह बताना चाहिए कि कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें कितने मृतक थे और कितने लोग दूसरी जगह चले गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया, तब SIR की घोषणा कर दी गई। खड़गे ने कहा कि विपक्ष केवल योग्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना चाहता है और चुनाव आयोग को हटाए गए नामों का पूरा आंकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने इस मामले में चुनाव आयोग से कई बार जानकारी मांगी, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

ज्ञानेश कुमार को हटाने और 2023 का कानून रद्द करने की मांग

खड़गे ने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए, SIR की प्रक्रिया रोकी जाए और 2023 के नियुक्ति कानून को रद्द किया जाए।

उन्होंने कहा कि INDIA ब्लॉक देश की करीब 60 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और विपक्षी दल मताधिकार की रक्षा के लिए एकजुट हैं। खड़गे ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर लड़ाई जारी रखेगा।

कार्यक्रम में विपक्ष के कई दलों के नेता शामिल हुए। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कार्यवाही की अध्यक्षता की। इसके बाद राहुल गांधी ने भी कार्यक्रम में अपनी बात रखी।

क्या है पब्लिक महाभियोग?

यहां एक बात समझना जरूरी है कि खड़गे के आवास पर आयोजित ‘पब्लिक महाभियोग’ संवैधानिक या कानूनी प्रक्रिया के तहत होने वाला वास्तविक महाभियोग नहीं है। यह विपक्ष का प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम था, जिसमें मॉक पार्लियामेंट के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आरोप और उन्हें पद से हटाने की मांग रखी गई।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया संसद के जरिए होती है। विपक्ष का यह कार्यक्रम उसी मांग को सार्वजनिक रूप से उठाने और SIR के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए आयोजित किया गया।

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