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केरल में बढ़ा ‘रैट फीवर’ का खतरा, पांच साल में मौतों में बड़ा इजाफा, अब तक 13 हजार मामले कन्फर्म

rat fever

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केरल में बारिश और बाढ़ के मौसम के दौरान फैलने वाली लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी, जिसे आम भाषा में ‘रैट फीवर’ कहा जाता है, अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। सरकारी डेथ ऑडिट के हालिया आंकड़ों के अनुसार, राज्य में संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौतों में इस बीमारी की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।

मजदूरों और किसानों पर सबसे ज्यादा असर

अस्पतालों से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में लेप्टोस्पायरोसिस से सबसे ज्यादा मौतें शारीरिक मेहनत करने वाले मजदूरों की हुईं। कुल मौतों में करीब 37 फीसदी हिस्सेदारी इसी वर्ग की रही। इसके अलावा कृषि मजदूरों और घरेलू कामकाज करने वाली महिलाओं में भी इस बीमारी का असर देखने को मिला।

रिपोर्ट के अनुसार, 40 से 69 साल की उम्र के लोग इस संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक मौतों की संख्या सरकारी रिकॉर्ड से अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामलों में बीमारी की समय पर पहचान नहीं हो पाती।

पांच साल में तेजी से बढ़ीं मौतें

केरल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (K-CDC) के निदेशक डॉ. अल्थाफ ए ने कहा कि डेंगू जैसी बीमारियों पर ज्यादा चर्चा होती है, लेकिन लेप्टोस्पायरोसिस भी उतनी ही गंभीर बीमारी है। उनके मुताबिक, राज्य में संक्रामक रोगों से होने वाली कुल मौतों में इस बीमारी की हिस्सेदारी 52 फीसदी तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और सही इलाज से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।

आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इस बीमारी का खतरा काफी बढ़ा है। वर्ष 2016 से 2020 के बीच लेप्टोस्पायरोसिस से 319 मौतें दर्ज की गई थीं, जबकि 2021 से 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 1,455 तक पहुंच गई। इसी अवधि में बीमारी से मौत की दर और संक्रमित मरीजों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से बारिश या बाढ़ के पानी के संपर्क में आने पर सावधानी बरतने और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है।

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