Kamal Haasan statement ने एक बार फिर भारत में फिल्म सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को लेकर बहस छेड़ दी है। अभिनेता-राजनेता ने चल रहे ‘Jana Nayagan’ कानूनी विवाद के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और समयबद्ध फैसलों की जरूरत पर जोर दिया है।
Kamal Haasan statement में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
वरिष्ठ अभिनेता और राजनेता Kamal Haasan ने बिना किसी संस्था या फिल्म का नाम लिए एक व्यापक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और इसे अस्पष्ट प्रक्रियाओं से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार, यह मामला किसी एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस स्थान को दर्शाता है जो एक संवैधानिक लोकतंत्र में कला और कलाकारों को दिया जाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सिनेमा सामूहिक श्रम का परिणाम होता है, जिससे हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी रहती है।
फिल्म सर्टिफिकेशन और पारदर्शिता की जरूरत
Kamal Haasan statement में सर्टिफिकेशन प्रक्रिया की अस्पष्टता पर खास चिंता जताई गई। उन्होंने कहा कि जब प्रक्रियाएं साफ नहीं होतीं, तो रचनात्मकता सीमित होती है और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
उनका तर्क था कि दर्शक समझदार और परिपक्व हैं, इसलिए उन्हें पारदर्शिता और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट समय-सीमा, पारदर्शी मूल्यांकन और हर सुझाए गए कट या बदलाव के लिए लिखित कारण अनिवार्य करने की बात कही।

‘Public trust is weakened’ का आशय
कमल हासन के अनुसार, जब निर्णयों के पीछे तर्क सामने नहीं आते, तो केवल फिल्म उद्योग ही नहीं, बल्कि संस्थाओं पर जनता का भरोसा भी कमजोर पड़ता है। Kamal Haasan statement में यह वाक्य एक व्यापक चेतावनी के रूप में सामने आया।
उन्होंने यह भी कहा कि पारदर्शिता की कमी से कलाकारों और दर्शकों के बीच की भरोसे की डोर कमजोर होती है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
‘Jana Nayagan’ विवाद की पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय आया है, जब तमिल फिल्म Jana Nayagan को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है। फिल्म के निर्माताओं का कहना है कि पहले सुझाए गए कुछ कट्स के बाद फिल्म को मंजूरी मिल गई थी।
हालांकि, रिलीज़ से ठीक पहले एक शिकायत के आधार पर फिल्म को पुनरीक्षण समिति के पास भेज दिया गया। शिकायतकर्ता की पहचान स्पष्ट न होने और समय की कमी के कारण निर्माता अदालत पहुंचे।

मद्रास हाई कोर्ट का रुख
Madras High Court ने मामले की सुनवाई के बाद फिल्म को U/A 16+ सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने माना कि समय पर रिलीज़ न होने से निर्माताओं और जुड़े लोगों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
हालांकि, बाद में Central Board of Film Certification (CBFC) ने इस आदेश को चुनौती दी, जिसके चलते सर्टिफिकेट जारी करने पर अस्थायी रोक लग गई।
निर्माताओं की प्रतिक्रिया
फिल्म के निर्माता ने एक वीडियो संदेश में कहा कि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि अंतिम समय में फिल्म को पुनरीक्षण समिति को भेजे जाने से अनिश्चितता पैदा हुई, जिससे रिलीज़ योजना प्रभावित हुई।
निर्माताओं का कहना है कि समयबद्ध और स्पष्ट प्रक्रिया होती, तो इस स्थिति से बचा जा सकता था। Kamal Haasan statement इसी संदर्भ में उद्योग की व्यापक चिंता को आवाज़ देता है।

उद्योग में एकजुट संवाद की अपील
कमल हासन ने फिल्म उद्योग से अपील की कि वह एकजुट होकर रचनात्मक और सार्थक संवाद करे। उनके अनुसार, सुधार सिर्फ टकराव से नहीं, बल्कि संवाद और सिद्धांत आधारित बदलाव से संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी पहलें रचनात्मक स्वतंत्रता की रक्षा करेंगी और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करेंगी, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में भरोसा बढ़ेगा।
व्यापक प्रभाव और आगे की दिशा
Kamal Haasan statement को कई लोग एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। यह केवल एक फिल्म का मुद्दा नहीं, बल्कि सिनेमा, आजीविका और संस्थागत विश्वास से जुड़ा प्रश्न बन गया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सर्टिफिकेशन प्रक्रिया में सुधार होते हैं, तो इससे उद्योग में स्थिरता और पारदर्शिता दोनों बढ़ सकती हैं। वहीं, स्पष्ट नियम न होने की स्थिति में ऐसे विवाद आगे भी सामने आ सकते हैं।
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