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21 जून को वर्ष का सबसे बड़ा दिन, 14 घंटे तक उदयमान रहे सूर्य, 10 घंटे की रात, खुद की परछाई गायब

विशेष। 21 जून को उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है। इस दिन की अवधि लगभग 13 से 14 घंटे (स्थान के अक्षांश के आधार पर), रात की अवधि लगभग 10 से 11 घंटे की रहती है। इस दिन सूर्योदय 5 बजकर 24 मिनट पर हुआ जबकि सूर्यास्त शाम 7 बजकर 23 मिनट पर।

यह घटना ग्रीष्म संक्रांति कहलाती है, क्योंकि इस दिन सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर होता है। जानकारों के अनुसार 21 जून को पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर सबसे अधिक झुका होता है। इस खगोलीय स्थिति (ग्रीष्म अयनांत) में सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी (90 डिग्री) पड़ती हैं। इससे भारत जैसे उत्तरी गोलार्ध वाले क्षेत्रों में सूर्य का प्रकाश सबसे अधिक समय तक रहता है, जिससे दिन सबसे लंबा होता है।

ऐसी है वैज्ञानिक और खगोलीय प्रक्रिया

खगोलीय विज्ञान के अनुसार 21 जून को पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अपने अधिकतम झुकाव पर होता है। इस कारण सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं। इसी वजह से सूर्य अधिक समय तक आकाश में दिखाई देता है और उत्तरी गोलार्ध में दिन सबसे लंबा होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य का यह परिवर्तन ऊर्जा, आत्मविश्वास और जीवन में बदलाव का प्रतीक माना जाता है। सूर्य की मजबूत स्थिति को सफलता और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।

ग्रीष्म संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व

संक्रांति का अर्थ होता है सूर्य का एक राशि या स्थिति से दूसरी स्थिति में प्रवेश करना। 21 जून के आसपास सूर्य अपनी उत्तर दिशा की यात्रा के चरम पर पहुंचता है। इसके बाद सूर्य दक्षिण दिशा की ओर बढ़ने लगता है, जिसे दक्षिणायन की शुरुआत माना जाता है। ज्योतिष में सूर्य की गति का विशेष महत्व है क्योंकि सूर्य व्यक्ति की कुंडली में आत्मबल, नेतृत्व क्षमता और भाग्य को प्रभावित करने वाला ग्रह माना जाता है।

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