जामू की कृपा !

jamun (1)

Hindi Kahani :जाने क्यों मुझे इस पेड़ के नीचे बड़ा सुकून महसूस होता है इसकी छाँव में आकर यूँ लगता है जैसे कोई मुझे सहारा दे रहा है। दो बरस बीत गए मेरी शादी को पर ससुराल में कोई मुझे इतना अपना नहीं लगता जितना ये पेड़ लगता है शायद इसलिए भी कि ये मुझे बहोत मीठी जामुन खिलाता है सब कहते हैं मीरा ये तेरे आने पर ही फलना शुरू हुआ था और इसके जैसी मीठी जामुन पूरे गाँव में नहीं है ,मै तो यही सुन-सुन के खुश हो जाती हूँ कि ऐसा जामुन का पेड़ मेरे आँगन में लगा है। मेरा सारा दिन ही मानों इसी आँगन में बीतता है यहीं मेरा नदी से लगा कुंड है तो बस ठंडी हो या गर्मी इसी के पास आकर कभी धूप तलाशती हूँ तो कभी घम छइयाँ। स्नान के बाद तुलसी को जल चढ़ाती तो जामू को भी न भूलती। ये मानों मेरे सुख दुख का सच्चा साथी है शायद सुनील से भी ज़्यादा, उनसे मै इतनी बातें नहीं करती जितनी इस जामू से करती हूँ हाँ प्यार से मै इसे जामू कहती हूँ पर सुनील को दोष क्या दूँ, उनके पास इतना वक़्त भी नहीं है वो ज़्यादातर शहर में ही रहते हैं और जब घर आए तो अम्मा ,बापू की सेवा में ही लगे रहते हैं।

मै अकेले करूँ भी क्या अम्मा बापू भी खेतों में रहे आते हैं और मै घर में अकेले तो बस जामू से ही बातें करती रहती हूँ सब कहते भी हैं कि मीरा तुझे अकेलापन नहीं लगता तो मै भी कह देती हूँ कि अम्मा की गइयाँ हैं तो ये मुझे बोर ही कहाँ होने देती हैं कि कुछ और सोचूँ , सबसे जामू के बारे में इसलिए नहीं बताती क्योंकि लोग मुझे पागल समझेंगे ह ह हा…

आज सुबह से मेरा कुछ काम में मन नहीं लग रहा था पर किसी तरह चूल्हा चौका करके आँगन में बैठी तो अम्मा ने कुछ केरी लाकर मुझे दे दीं और बोलीं “ले खा ले तुझे अच्छी लगेंगीं ,और सुन अब दिन भर कुछ काम न करना आराम करना मुझे तेरा जी नहीं अच्छा लग रहा है इन दिनों में इतना काम नहीं करना चाहिए।” और इतना कहके वो खेत की ओर चली गईं।

इसी तरह दिन बीत गए और वो दिन आ गया जब मेरा बेटा पैदा हुआ , बड़े प्यार से वो इस दुनिया में आ गया मुझे ज़रा भी परेशानी नहीं हुई अम्मा कहने लगी बड़ी भागमानी है मेरी बहू। घर में खुशियाँ छा गईं बेटे को सबने कृष्णा नाम दिया ,सुनील भी आ गए और ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे इस बार उनका शहर जाने का मन ही नहीं है पर कुछ ही दिन में वो शहर के लिए चल दिए मै भी धीरे -धीरे कृष्णा की परवरिश में लग गई और फिर जामू को भी नया दोस्त मिल गया था मै उसकी छाँव में कृष्णा को झूले में लेटा देती, वो उसकी हिलती डुलती पत्तियों को देखकर खूब खुश होकर खेलता और मै दोनों से बातें करती रहती।

एक दिन शहर से खबर आई कि सुनील का एक्सीडेंट हो गया है अम्मा और बापू शहर दौड़े मुझे लगा कि बस देव को लेकर जल्दी आ जाएँगें लेकिन वो जब आए तो सुनील को नहीं उसकी लाश को साथ लाए। मेरा सारा हँसना बोलना बंद हो गया एक साल होने को आया पर कृष्णा और जामू भी मुझे बड़ी मुश्किल से हँसा पाते पर मैं न हँसती तो कृष्णा भी उदास हो जाता इसलिए मैंने खुद को संभाला और फिर सबके लिए हँसने मुस्कुराने लगी।

एक दिन अम्मा बहोत बीमार हो गईं मैंने उनकी सेवा में दिन रात एक कर दिए पर डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए। अब फिर एक सन्नाटा छा गया कृष्णा भी चुप था और जामू भी उनको तो किसी तरह बहला भी लेती मगर बापू को कैसे समझाती उनके बेटे के जाने का ग़म अभी ताज़ा ही था कि अम्मा भी उनका साथ छोड़ कर चली गईं किसी तरह इन दुख भरे दिनों का सन्नाटा खत्म हुआ और घर में कृष्णा की हँसी गूंजने लगी उसकी नटखट शरारतों में बापू भी धीरे – धीरे अपना ग़म भूलने लगे। कृष्णा चार बरस का हो गया , बापू की ऊँगली थामें अब तो स्कूल भी जाने लगा था पर एक दिन बापू उसको स्कूल छोड़ने के लिए नहीं उठे मैंने आवाज़ दी तो भी नहीं उठे, पास जाके देखा तो पता चला वो भी आज मुझे छोड़कर आराम की नींद सो गए थे।

मैंने उसी दिन से कमर कस ली कि अब तो मुझे आराम करना ही नहीं है ख़ैर कृष्णा को गोदी में लिए मैंने घर आँगन से लेकर गाय-बैल और खलिहान तक सब संभाल लिया। कृष्णा को पालने में मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। जिस दिन घर में खाने को कुछ नहीं था , उस दिन गायों ने खूब दूध दिया और जामू ने मीठे – मीठे जामुन पूरे आँगन में बिछा दिए। अब तो लोग मुझे मीरा कम और जामुन वाली चाची के नाम से ज़्यादा जानते हैं। कृष्णा भी देखते – देखते 20 बरस का हो गया और मेरा हाँथ बटाने लगा। इतने सालों में कुछ पहले जैसा था तो वो जामू था ,वो आज भी मुझे वैसी ही ठंडी सुकून भरी छाँव दे रहा था जैसी जब दे रहा था जब मै नई नवेली दुल्हन बनके इस आँगन में बैठी थी।

अब फिर मै वही पहले वाले सुकून को महसूस कर रही थी कि कृष्णा ,पड़ोस की राधा को लेके आया और कहने लगा देख राधा जितने जामुन लेने हों ले ले पर मेरे जामू को कुछ नुकसान न पहुँचाना और हाँ मेरी माँ का ख्याल रखना मै खेत जा रहा हूँ ‘ फिर ज़ोर से चिल्लाते हुए बोला माँ तुझे तो कोई ऐतराज़ नहीं है राधा तेरी सेवा करे तो ? मैंने भी हँसते हुए कह दिया अरे नहीं तेरी पसंद ,मुझे भी पसंद है।अच्छा हुआ मुझे बहू ढूँढने नहीं जाना पड़ा जामू की कृपा से उसी की छाँव में मुझे बहू भी मिल गई अब तो इस आँगन को छोड़कर जब ही जाऊँगीं जब स्वर्ग सिधारूंगी।

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