Jabalpur Cruise Accident News: मध्यप्रदेश के बरगी डैम (Bargi Dam) में गुरुवार दोपहर हुआ भीषण हादसा पूरे देश को झकझोर गया है। जबलपुर क्रूज हादसा के अनुसार पर्यटन विभाग का एक क्रूज अचानक आई तेज आंधी की चपेट में आकर डूब गया। अब तक 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। प्रशासन के मुताबिक 9 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
कैसे हुआ हादसा: 300 मीटर दूर ही बन गया मौत का मंजर
यह हादसा दोपहर 3 से 4 बजे के बीच हुआ, जब क्रूज किनारे से करीब 300 मीटर दूर था। उस वक्त अचानक मौसम बिगड़ा और तेज आंधी-तूफान ने क्रूज को असंतुलित कर दिया। बरगी डैम नाव पलटने की घटना (Bargi Dam Boat Capsize Incident) में सामने आया है कि क्रूज में लगभग 43 से 47 लोग सवार थे, जबकि टिकट केवल 29 यात्रियों के ही काटे गए थे। नाव ओवरलोडिंग मामला भारत जैसी स्थिति ने अब प्रशासन और पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन: SDRF, सेना और स्पेशल टीमों ने संभाला मोर्चा
हादसे के तुरंत बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। एसडीआरएफ रेस्क्यू ऑपरेशन जबलपुर (SDRF Rescue Operation In Jabalpur) के तहत कई लोगों को शुरुआती दौर में बचा लिया गया, लेकिन अंधेरा और खराब मौसम के कारण राहत कार्य प्रभावित हुआ। शुक्रवार सुबह फिर से सर्च ऑपरेशन तेज किया गया। भारतीय सेना बचाव मिशन बरगी डैम (Indian Army Rescue Mission Bargi Dam) के तहत आर्मी मौके पर तैनात है।
हैदराबाद से स्पेशल टीम और हेलिकॉप्टर भेजे गए हैं, जबकि कोलकाता से पैरामिलिट्री फोर्स की विशेष टीम भी पहुंच चुकी है। हाइड्रॉलिक मशीनों और पोकलेन की मदद से करीब 20 फीट गहरे पानी में डूबे क्रूज को बाहर निकालने की कोशिश जारी है।
दिल दहला देने वाला दृश्य: मां ने आखिरी सांस तक बेटे को नहीं छोड़ा
इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर मरिना मैसी और उनके 4 साल के बेटे त्रिशान की रही। बचाव दल को दोनों के शव एक साथ मिले—मां ने अपने बेटे को लाइफ जैकेट के अंदर सीने से कसकर लगा रखा था। मां-बेटे की भावुक कहानी जबलपुर हादसा ने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया। यह परिवार दिल्ली से घूमने आया था। हादसे में पिता प्रदीप मैसी और बेटी सिया किसी तरह बच गए, लेकिन मां और बेटे की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़: खमरिया का परिवार भी प्रभावित
ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया के कर्मचारी कामराज आर्य अपने परिवार के 15 लोगों के साथ घूमने आए थे। उनके माता-पिता किनारे पर ही थे, लेकिन बाकी सदस्य क्रूज में सवार थे। इस हादसे के बाद एक बेटे को तो बचा लिया गया, लेकिन कामराज, उनकी पत्नी और एक बेटा अभी भी लापता हैं। नाव हादसे के बाद परिवार लापता भारत जैसी स्थिति ने कई घरों में मातम पसरा दिया है।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया: मौके पर पहुंचेंगे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री मोहन यादव के जबलपुर पहुंचने की संभावना जताई गई है। वहीं प्रदेश के पर्यटन मंत्री के बयान ने भी विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने पेट्रोल-डीजल बोट पर रोक की जानकारी न होने की बात कही। एमपी पर्यटन लापरवाही मामला (MP Tourism Safety Negligence Case) अब तूल पकड़ता जा रहा है और जांच की मांग तेज हो गई है।
क्रूज की हालत पर सवाल: 20 साल पुराना जहाज
पर्यटन विभाग के अनुसार यह क्रूज साल 2006 में बनाया गया था और इसकी क्षमता 60 यात्रियों की थी। पुराने क्रूज सुरक्षा मुद्दे भारत और पर्यटन सुरक्षा नियम भारत को लेकर अब गंभीर बहस छिड़ गई है कि क्या इतने पुराने क्रूज का फिटनेस टेस्ट और मेंटेनेंस सही तरीके से किया गया था या नहीं।
महिलाओं और बच्चे समेत 9 की मौत
अब तक जिन 9 लोगों के शव मिले हैं, उनमें 8 महिलाएं और एक 4 साल का बच्चा शामिल है। मृतकों में जबलपुर, तमिलनाडु और दिल्ली के लोग शामिल हैं। लापता पर्यटक सूची जबलपुर लगातार अपडेट की जा रही है, जबकि कई परिवार अब भी अपनों की तलाश में हैं।
मृतकों की सूची: 8 महिलाएं और एक मासूम शामिल
अब तक जिन 9 लोगों की मौत हुई है, उनकी पहचान इस प्रकार है:
- श्रीमती नीतू सोनी (43), निवासी कोतवाली, जबलपुर
- श्रीमती सौभाग्यम अलागन (42), निवासी अन्नानगर, तमिलनाडु
- श्रीमती मधुर मैसी (62), निवासी नई दिल्ली
- श्रीमती करकुलाझी (38), निवासी खमरिया, जबलपुर
- श्रीमती रेशमा सैयद (66)
- सयदा अमीन फातिमा (68)
- मरिना मैसी (39), निवासी नई दिल्ली
- त्रिशान (4), पुत्र प्रदीप मैसी
- श्रीमती ज्योति सेन, निवासी पाटन बायपास, जबलपुर
अभी लगभग 9 पर्यटक लापता हैं, हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है.
क्रूज पायलट का बयान: “संभलने का मौका ही नहीं मिला”
क्रूज के पायलट महेश, जिनके पास 10 साल का अनुभव है, ने बताया कि सुरक्षा के इंतजाम मौजूद थे, लेकिन अचानक आए तूफान ने सबकुछ पलट दिया। उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब थे कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

