बजट पेश होते ही ITC Share अचानक चर्चा में आ गया, जब शेयर 52-सप्ताह के निचले स्तर तक फिसल गया है। सरकार द्वारा सिगरेट और अन्य तंबाकू प्रोडक्ट्स पर extra एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के ऐलान ने निवेशक को चौंका दिया। इस फैसले का सीधा असर ITC के सबसे मुनाफ़ादायक कारोबार पर पड़ता दिखा है जिससे बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली।
बजट घोषणा के बाद क्यों टूटा ITC Share
वित्त मंत्री द्वारा तंबाकू उत्पाद पर नए एक्साइज ढांचे की घोषणा के तुरंत बाद ITC के शेयर में गिरावट शुरू हो गई है। सिगरेट की लंबाई के आधार पर लगने वाली नई ड्यूटी से उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका जताई है। चूंकि ITC का प्रमुख राजस्व सिगरेट कारोबार से आता है, इसलिए इस नीति बदलाव को निवेशक ने कंपनी के मुनाफे पर सीधा दबाव माना है। बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया बेहद नेगेटिव रही और ट्रेडिंग के दौरान शेयर 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया।
ये भी पढ़े : Tax and social schemes Budget 2026
सिगरेट कारोबार पर सबसे बड़ा असर
ITC के कुल मुनाफे में सिगरेट बिजनेस की बड़ी हिस्सेदारी है। टैक्स बढ़ने के बाद कंपनियों के सामने दो ही विकल्प बचते हैं या तो कीमतें बढ़ाई जाएं या मार्जिन कम किया जाए। कीमतें बढ़ने पर खपत घटने का जोखिम होता है, जो बिक्री को अधिक प्रभावित कर सकता है। इसी चिंता ने निवेशक की धारणा को कमजोर किया और ITC Share पर दबाव बढ़ गया।
निवेशकों में चिंता और बिकवाली का माहौल
बजट के तुरंत बाद ट्रेडिंग फ्लोर पर ITC को लेकर बिकवाली का रुख दिखा है। निवेशकों को यह डर सताने लगा है कि आगे भी तंबाकू उत्पाद पर टैक्स बढ़ सकता है।
क्या अन्य कारोबार ITC को सहारा दे पाएंगे?
हालांकि सिगरेट कारोबार ITC की रीढ़ होती है, लेकिन कंपनी FMCG, होटल, पेपरबोर्ड और एग्री बिजनेस जैसे क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार कर रही है। ये सेगमेंट लंबे समय में कंपनी को संतुलन प्रदान कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंपनी टैक्स का बोझ प्लानिंग के रूप से मैनेज कर लेती है, तो ITC Share में स्थिरता लौट सकती है।
ये भी पढ़े : 18k gold price
आगे क्या रह सकता है रुख
शॉर्ट-टर्म में ITC के शेयर पर दबाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन लंबी अवधि के निवेशक इसे बिल्कुल अलग नजरिए से देख रहे हैं। उनके अनुसार, मजबूत ब्रांड, विविध बिजनेस मॉडल और स्थिर मांग कंपनी को भविष्य में संभाल सकती है।
फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि कंपनी बढ़ी हुई ड्यूटी का प्रभाव कैसे संभालती है और कीमतों में कितना बदलाव करती है।

