Israel-Iran War Impact: इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टेंशन का असर अब अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखने लगा है. गौरतलब है कि, हालातों को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बीते दिन यानी सोमवार को क्रूड ऑयल, LPG और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट की उपलब्धता की समीक्षा की. इसका मतलब साफ है कि, सरकार सुनिश्चित करना चाहती है कि देश में ईंधन की सप्लाई प्रभावित न हो और आम लोगों को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े.
आपको बता दें कि, एक आधिकारिक बयान में मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल हालात को देखते हुए सीनियर ऑफिशियल्स और पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनियों के साथ मीटिंग की. इस मीटिंग में देश में क्रूड ऑयल और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट की आपूर्ति स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई.
पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता के लिए जरूरी कदम उठाएंगे
गौरतलब है कि, सरकार बदलती स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है. मंत्रालय के बयान पर कहा, हम हालात पर लगातार निगरानी कर रहे हैं और देश में प्रमुख पेट्रोलियम प्रोडक्ट की उपलब्धता और वहनीयता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सरकार का भरोसा
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते टेंशन के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल, LPG जैसे जरूरी पेट्रोलियम प्रोडक्ट की उपलब्धता और उनकी कीमतों को काबू में रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
Crude Oil Prices (कच्चे तेल का भाव)
इस परिस्थिति के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. जब इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका सीधा असर उन देशों पर पड़ता है जो उसे ज्यादा आयात करते हैं, जैसे भारत!कीमतों में तेजी से सरकार और तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ जाता है.
भारत की आयात पर निर्भरता
अब सबसे जरूरी और खास बात बताते हैं, गौरतलब है कि, भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा क्रूड ऑयल विदेशों से खरीदता है, जिसमें बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है. इसलिए वहां की राजनीतिक या सैन्य स्थिति का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है. इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार, क्रूड ऑयल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत के सालाना आयात बिल में करीब 2 बिलियन डॉलर का इजाफा हो सकता है. इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है. इसलिए सरकार स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है.
