Offer for Sale के तहत केंद्र सरकार ने इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) में अपनी हिस्सेदारी का 4% हिस्सा बेचने का फैसला लिया है। बेचने की प्रक्रिया 25 फरवरी 2026 से शुरू हुई है, जिसमें फ्लोर प्राइस ₹104 प्रति शेयर का तय किया गया है। इस कदम से सरकार ने लगभग ₹5,430 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है, जिसका असर IRFC के शेयर पर कुछ समय के दबाव के रूप में देखा गया है।
IRFC OFS का ढांचा और सरकारी प्लानिंग
स्टॉक एक्सचेंज डाटा के अनुसार यह ऑफर फॉर सेल दो हिस्सों में बात हुआ है पहला हिस्सा 2% इक्विटी की बेस पेशकश होने वाला है जबकि दूसरा हिस्सा दो प्रतिशत ग्रीन शू ऑप्शन के रूप में उपलब्ध होगा अगर यह पूरा 4% बिकता है तो सरकार की हिस्सेदारी लगभग 86 पॉइंट 36 प्रतिशत से घटकर करीब 82 पॉइंट 36 प्रतिशत रहेगी। फाइनेंस मंत्रालय के निवेश और सार्वजनिक संपत्ति विभाग की ओर से यह कदम सरकार की विनिवेश प्लानिंग का एक हिस्सा बताया जा रहा है। निवेशकों के अनुसार इससे पब्लिकली हिस्सेदारी बढ़ेगी और शेयर में तरलता सुधर सकती है।
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शेयर प्रदर्शन और बाजार की प्रतिक्रिया
Offer for Sale की घोषणा के बाद IRFC share मैं शुरुआती बिजनेस में हल्की कमजोरी देखी गई है मार्केट के विशेषज्ञ के अनुसार बड़े पैमाने पर शेयर की आपूर्ति बढ़ने से कुछ समय का दबाव होना स्वाभाविक है। हाल ही के सत्र में शेर का क्लोजिंग प्राइस फ्लोर प्राइस के आसपास ही दिख रहा है जबकि इंट्राडे में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया है। सेक्टर की अन्य पीएसयू की कंपनी की तुलना में आईआरएफसी का प्रदर्शन भी स्थिर दिख रहा है। हालांकि बाजार की भावना विनिवेश की खबर से प्रभावित दिख रही है।
कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति
हालांकि कंपनी के आधिकारिक फाइनेंशियल नतीजे की जानकारी के अनुसार IRFC ने हाल ही के तिमाही में मुनाफे में वृद्धि दर्ज की है। एसेट अंडर मैनेजमेंट और नेट वर्थ में भी बड़ा हुआ विस्तार देखने को मिला है। भारतीय रेलवे की पूंजीगत जरूरत से जुड़े लंबे समय के शेयर कंपनी के राजस्व प्रवाह को स्थिर आधार प्रदान करते हैं। बाजार के विश्लेषकों के अनुसार मजबूत बैलेंस शीट और नियमित डिविडेंड भुगतान होने से IRFC को पीएसयू फाइनेंस स्पेस में अलग पहचान देते हैं।
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निवेशको के लिए राय
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार ऑफर फॉर सेल कुछ समय की स्थिरता ला सकता है लेकिन लंबे समय के दृष्टिकोण से कंपनी के बुनियादी मजबूती पर ही निर्भर करता है। अगर OFS को मजबूत सब्सक्रिप्शन मिल जाता है तो यह बाजार विश्वास का संकेत होगा। हालांकि भविष्य की चाल ब्याज दर, सरकारी पूंजीगत खर्च और रेलवे की प्रोजेक्ट की गति पर निर्भर करेगी। निवेश करने वाले लोगों को निर्णय लेते समय जोखिम प्रोफाइल और निवेश के समय का ध्यान रखना होगा। यह जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है इसे निवेश की सलाह ना समझे।

