Iran Israel War Impact on India Trade : ईरान और इजराइल वॉर के चलते मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। शनिवार की सुबह हुए इजराइली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। जिसके नबाद बौखलाये ईरान अमेरिका और इजराइल के साथ-साथ दुबई, UAE, कतर, कुवैत और दोहा में मिसाइलें दागी। ईरानी सेना ने दुबई में सबसे ज्यादा हमले किए। इसके साथ ही इराक भी इस जंग में कूद गया और ईरान की ओर से अमेरिकी बेस पर हमला कर दिया। जिसके जवाब में इजराइल ने फिर से ईरान पर बिना रुके हमले शुरू कर दिए। इधर ब्रिटेन ने भी दावा किया कि कई जगह मिसाइलें दागी गई हैं। इस जंग का असर अब ईरान पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। भारत पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। इसे समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि भारत ईरान से क्या-क्या मंगवाता था?
भारत का ईरान से कैसा रिश्ता है?
भारत और ईरान के बीच व्यापारिक संबंध हैं, जो काफ़ी पुराने हैं। 1950 में दोनों देशों ने औपचारिक कूटनीतिक रिश्ता कायम किया था। 1970 के दशक के बाद व्यापारिक संबंध और मजबूत हुए। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने ईरान के साथ कई वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था जारी रखी हैं, जिनमें रुपया-रियाल प्रणाली भी शामिल है। ईरान भारत के लिए ऊर्जा, समुद्री व्यापार, और मध्य एशिया तक पहुंच के लिहाज से बेहद जरूरी देश है। इसलिए भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश किया है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सामान पहुंचाने का अहम केंद्र है।
ईरान से भारत क्या-क्या सामान मंगवाता है?
कच्चे तेल का आयात
ईरान भारत का प्रमुख तेल आयातक रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आयात में कमी आई है, लेकिन अगर ईरान से सप्लाई रुक जाती है, तो ग्लोबल तेल बाजार में कीमतें तेज़ी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा।
पेट्रोकेमिकल्स और रासायनिक उत्पाद का आयात
भारत ईरान से खास पेट्रोकेमिकल्स और रसायन भी खरीदता है, जिनका इस्तेमाल प्लास्टिक, उर्वरक, दवाओं, और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में होता है। सप्लाई में रुकावट आने पर उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
सूखे मेवों का आयात
ईरान से पिस्ता, खजूर, केसर, और अन्य सूखे मेवे भारत आते हैं। इसके अलावा सेब और कीवी जैसे फल भी मंगवाए जाते हैं। यदि युद्ध या तनाव बढ़ता है, तो इन वस्तुओं की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
कांच और औद्योगिक मशीनरी का आयात
कुछ खास ग्लास और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट भी ईरान से आते हैं, जिनकी सप्लाई बाधित होने से छोटी इंडस्ट्रियल इकाइयों को नुकसान पहुंचेगा और कीमतें बढ़ेंगी।
भारत में बढ़ सकती हैं तेल की कीमतें
भारत की ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। भारत का करीब आधा कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। अगर इस समुद्री मार्ग में रुकावट आती है, तो भारत का करीब 50% तेल आयात प्रभावित हो सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और भारत का आयात बिल बढ़ेगा।
बाजारों में महंगी हो सकती हैं ये चीजें
मिडिल ईस्ट में तनाव (Iran Israel War) के कारण नौवहन में खतरा बढ़ जाएगा। जहाजों का बीमा महंगा हो सकता है, और माल ढुलाई में भी बढ़ोतरी होगी। इसका असर सिर्फ तेल पर ही नहीं, बल्कि अन्य सामानों के आयात-निर्यात पर भी पड़ेगा। लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से भारत की एक्सपोर्ट प्राइसिंग महंगी हो सकती है, और प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है।
अगर तनाव लंबा खिंचता है, तो पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, हवाई टिकट, ट्रांसपोर्ट, खाने का तेल, और आयातित फल-सूखे मेवे की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ऊर्जा की महंगाई से हर सेक्टर पर असर पड़ेगा, और महंगाई तेज हो सकती है।
यह भी पढ़े : Donald Trump Insulted Pakistan : ट्रंप ने इशारे से शहबाज़ शरीफ को खड़ा कर PM मोदी की तारीफ की

