Iran Israel US War : इजराइल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो चुकी है। लेकिन ईरान जंग नहीं रोक रहा। ईरान अपने दम पर इजरायल और अमेरिका के खिलाफ लड़ रहा है। अपने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौत के बाद ईरान ने अपने रणनीति में बदलाव किया है और अब वह लगातार और नियंत्रित मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है, ताकि इजराइल और अमेरिका का रक्षा तंत्र टूट जाए।
ईरान ने जंग की रणनीति बदली
पश्चिमी रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को ईरान ने अब बड़े पैमाने पर हमलों के बजाय धीरे-धीरे और रणनीतिक रूप से हमला करने की नीति अपनाई है। इसका मकसद है कि इजराइल और अमेरिका की एयर डिफेंस सिस्टम को धीरे-धीरे कमजोर करना। इस बार ईरान के हमले सिर्फ इजरायल पर ही नहीं बल्कि यूएई, बहरीन, कतर, कुवैत और इराक जैसे खाड़ी देशों पर भी हो रहें हैं। जबकि इजरायल का कहना है कि मिसाइलों की संख्या कम है, लेकिन हमले की निरंतरता ज्यादा है, जिसे एक तरह की ‘धीमी बारिश’ की रणनीति कहा जा सकता है।अधिकांश मिसाइलें और ड्रोन तो एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा ही हवा में ही नष्ट कर दिए गए, लेकिन कुछ प्रोजेक्टाइल बच गए या फिर इतने खतरनाक नहीं थे।
ईरान ने इजराइल सहित कई देशों में मचाई तबाही
इजराइल का कहना है कि रविवार को हुई ईरानी हमलों में नुकसान तो हुआ, लेकिन ईरान के अंदर भी भारी नुकसान हुआ है, खासकर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, कई सैन्य अधिकारियों और रक्षा मंत्री की मौत से ईरान को बड़ा झटका लगा है। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने सीधे हमलों में करीब 10 लोगों की जान ली, जबकि यूएई में 150 से अधिक मिसाइलें, ड्रोन और क्रूज मिसाइलें दागी गईं, जिनमें तीन लोग मारे गए और कई घायल हुए। मनामा, दोहा और कुवैत जैसे स्थानों पर भी नुकसान की खबरें आ रही हैं।
ईरान के पास हैं 2,500 बैलिस्टिक मिसाइलें
सैन्य विश्लेषक मानते हैं कि ईरान इस जंग में पहले पुरानी और कम उन्नत मिसाइलें इस्तेमाल कर रहा है ताकि महंगे अमेरिकी इंटरसेप्टर सिस्टम की खपत को कम किया जा सके। ये सिस्टम बहुत महंगे हैं और इन्हें दोबारा तैयार करने में बहुत समय लगता है। ईरान ने बहरीन के मनामा में अमेरिकी नौसैनिक बेस पर ड्रोन हमला किया है, जिससे यह दिखाना चाहता है कि वह पूरी तरह बेबस नहीं है। इजरायली विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास करीब 2,500 बैलिस्टिक मिसाइलें हैं।
लंबी जंग लड़ेगा ईरान
इससे यह माना जा रहा है कि ईरान ये जंग लंबे समय तक चलाने वाला है। ईरान का मकसद है कि इजराइल और अमेरिका के नागरिकों पर मानसिक दबाव बनाकर उन्हें डराना। अब ईरान ‘झटके वाली लड़ाई’ के बजाय ‘धैर्य और सहनशक्ति की जंग’ लड़ने की तरफ बढ़ रहा है, जहां समय और संसाधनों का उपयोग ही सबसे बड़ा हथियार होगा।

