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क्या ईरान-इजराइल जंग में भारत कर रहा एंट्री? ओमान की खाड़ी में उतारी वॉरश‍िप, इंडियन नेवी अलर्ट 

Iran Israel war ins surat

Iran Israel Conflicts : 28 फ़रवरी से शुरू हुए ईरान और इजराइल-अमेरिका का युद्ध चौथे दिन भी जारी है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद ईरानी सी अमेरिका और इजरायल के साथ-साथ अन्य खाड़ी देशों पर भी कहर बनकर टूट पड़ी है। इन खाड़ी देशों में कतर, कुवैत, दुबई, बहरीन तेहरान, UAE और सऊदी अरब शामिल हैं। ईरानी सेनानी खाड़ी देशों में मिसाइल से हमला कर बड़ा नुकसान किया है, जिसमें कई लोगों की जान भी गई है। ईरानी सेवा का कहना है कि उनकी सेना इन देशों के अमेरिकी सैन्य बेस पर हमला कर रही है। ईरानी सी ने यह भी कहा है कि उनकी खाड़ी देशों के साथ कोई दुश्मनी नहीं है। वही इजरायली सी ने भी मंगलवार को ईरान पर कई बड़े हमले किए जिसमें ईरान के नए रक्षा मंत्री की भी मौत हो चुकी है। 

क्या ईरान-इजराइल जंग में कूदेगा भारत? | Iran Israel war

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे भीषण संघर्ष में क्या अब भारत की भी एंट्री हो रही है? इस सवाल में देश में हलचल मचा दी है। दरअसल, ईरान और इजरायल-अमेरिका जंग के तनाव के कारण न केवल हवाई यातायात ठप हो गया है, बल्कि समुद्री व्यापार के महत्वपूर्ण मार्ग भी संकट में हैं। ऐसे समय में भारतीय नौसेना पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। इंडियन नेवी ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ओमान की खाड़ी में वॉरशिप तैनात कर दी है जो  शक्तिशाली युद्धपोत है।

 ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना ने वॉरशिप क्यों तैनात की?

भारतीय नौसेना द्वारा ओमान की खाड़ी में वरशिप तैनात करने का एक कारण यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रद्द होने और मिसाइल हमलों के खतरे के चलते भारत में फंसे कई नागरिक मध्य-पूर्व के देशों में फंसे हुए हैं। जिसके लिए भारत सरकार ने राहत के लिए विशेष उड़ानें शुरू कर दी हैं, लेकिन अगर स्थिति और बिगड़ती है तो समुद्री रास्ते से निकासी की जरूरत पड़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय नौसेना के युद्धपोत को तैयार किया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर त्वरित राहत और बचाव अभियान चलाया जा सके।

इस इलाके में तैनात रहता है भारत का युद्धपोत 

बता दें कि भारतीय नौसेना 2017 से ‘मिशन डिप्लॉयमेंट’ के तहत इस क्षेत्र में दो बड़े अभियान चला रही है। ओमान की खाड़ी में ‘ऑपरेशन संकल्प’ चल रहा है, जबकि अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों के खिलाफ एंटी-पायरेसी अभियान चल रहा है। इसी वजह से नौसेना का ये युद्धपोत इस इलाके में मौजूद है। लेकिन ईरान-युद्ध की आशंका के चलते अपने नागरिकों को निकालने के लिए इसकी आवश्यकता पड़ सकती है। अगर अदन की खाड़ी से और युद्धपोतों की जरूरत पड़ी, तो उन्हें तुरंत यहां भेजा जा सकता है।

‘अदृश्य शिकारी’ कहा जाता है आईएनएस सूरत (INS Surat)

‘अदृश्य शिकारी’ के नाम से जाना जाने वाला आईएनएस सूरत कोई सामान्य युद्धपोत नहीं है। यह एक गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘स्टील्थ’ तकनीक है। यह दुश्मन के रडार की पकड़ से बचकर ऑपरेशन कर सकता है। इसमें अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियां लगी हैं। सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें वर्टिकल लॉन्चर से दागी जा सकती हैं, जिनसे कुल 32 मध्यम दूरी की ‘सर्फेस-टू-एयर’ मिसाइलें दागी जा सकती हैं। 

ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम से लैस यह युद्धपोत समुद्र में दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाने में सक्षम है। इसमें 16 ब्रह्मोस मिसाइलें दागी जा सकती हैं। साथ ही, इसमें आधुनिक सर्विलांस रडार और पनडुब्बियों का पता लगाने और नष्ट करने के लिए रॉकेट और टॉरपीडो लॉन्चर भी लगे हैं। यह युद्धपोत 163 मीटर लंबा और लगभग 7,400 टन वजनी है, और इसे चार शक्तिशाली गैस टर्बाइनों से चलाया जाता है, जिससे इसकी गति 30 समुद्री मील प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

जंग का हिस्सा नहीं बनेगा भारत 

फिलहाल, भारत ईरान और इजरायल जंग में एंट्री नहीं करने वाला है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही यूएई में हुए ईरानी हमले को लेकर नाराजगी जताई है लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत शांतिप्रिय विचारधारा से चल रहा है। भारत किसी भी जंग को बढ़ावा देने की मंशा नहीं रखता है। सूत्रों से मेरी जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री निर्धनों से फोन पर बातचीत भी की है। 

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