Iran-Israel Conflict में ईरान की ‘Asymmetric War’ पर पूर्व अमेरिकी विश्लेषक का बड़ा दावा। जानिए इस रणनीति के पीछे के गहरे मायने।

Conceptual map of Iran-Israel conflict with military drones and missiles illustration.

मिडल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पूर्व अमेरिकी ट्रेजरी काउंटर-टेररिज्म विश्लेषक ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनके अनुसार, Iran-Israel Conflict में ईरान ने सीधे टकराव के बजाय ‘असममित युद्ध’ (Asymmetric War) की रणनीति अपनाकर अपनी जीत घोषित कर दी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में सैन्य शक्ति के संतुलन और छद्म युद्ध (Proxy War) की भूमिका पर वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ी हुई है।

मिडल-ईस्ट की भू-राजनीति में ईरान और इजरायल के बीच का संघर्ष अब एक नए और जटिल दौर में प्रवेश कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपनी पारंपरिक सैन्य सीमाओं को समझते हुए सीधे युद्ध के बजाय रणनीतिक चालों पर अधिक भरोसा कर रहा है। हालिया घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान की योजना इजरायल को सीधे तौर पर हराने की नहीं, बल्कि उसे लंबी और थका देने वाली लड़ाई में उलझाने की है।

ये भी पढ़ें : दिल्ली की 1531 कच्ची कॉलोनियों के नियमितीकरण को मंजूरी मिली। पीएम-उदय योजना के तहत 50 लाख लोगों को मिलेगा मालिकाना हक। जानें आवेदन प्रक्रिया और जरूरी नियम।

युद्ध की बदलती परिभाषा और ईरान का रुख

असममित युद्ध या Asymmetric Warfare एक ऐसी स्थिति है जहाँ दो पक्षों की सैन्य शक्ति में बड़ा अंतर होता है। यहाँ कमजोर पक्ष सीधे हमले के बजाय गैर-पारंपरिक तरीकों का उपयोग करता है। Iran-Israel Conflict के संदर्भ में, पूर्व अमेरिकी विश्लेषक का कहना है कि ईरान ने अपने सहयोगियों और प्रॉक्सी समूहों के नेटवर्क का बखूबी इस्तेमाल किया है। इससे इजरायल को न केवल सीमा पर, बल्कि कई मोर्चों पर एक साथ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

रणनीतिक जीत का आधार क्या है?

ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मिसाइल तकनीक और ड्रोन प्रोग्राम तक सीमित नहीं रखा है। बल्कि उसने लेबनान, यमन और गाजा में फैले अपने प्रभाव का उपयोग करके एक ऐसा सुरक्षा चक्र बनाया है जिसे भेदना इजरायल के लिए महंगा साबित हो रहा है। विश्लेषक के अनुसार, ईरान की ‘जीत’ इस बात में नहीं है कि उसने इजरायल को कितना भौतिक नुकसान पहुँचाया, बल्कि इस बात में है कि उसने इजरायल की अभेद्य छवि को वैश्विक स्तर पर चुनौती दी है।

इजरायल की उन्नत तकनीक और ‘आयरन डोम’ जैसे रक्षा तंत्र के बावजूद, ईरान के कम लागत वाले ड्रोन और रॉकेट हमलों ने आर्थिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया है। यह दबाव ही उस ‘असममित युद्ध’ का हिस्सा है, जिसकी चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हो रही है।

Iran-Israel Conflict: क्या है ‘Asymmetric War’ की रणनीति?

असममित युद्ध में मुख्य लक्ष्य दुश्मन की अर्थव्यवस्था और नागरिक मनोबल को तोड़ना होता है। ईरान ने सीधे युद्ध से बचते हुए साइबर हमलों, ड्रोन ऑपरेशंस और क्षेत्रीय सहयोगियों के जरिए इजरायल को व्यस्त रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीति के कारण इजरायल को अपने संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा पर खर्च करना पड़ रहा है, जो ईरान के लिए एक रणनीतिक लाभ है।

ये भी पढ़ें : RBI GDP Growth FY27 में कटौती कर 6.9% किया गया, जबकि महंगाई 4.6% पहुंची। पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतें मुख्य कारण।

क्षेत्रीय स्थिरता पर पूर्व अमेरिकी विश्लेषक की राय

पूर्व अमेरिकी ट्रेजरी काउंटर-टेररिज्म विश्लेषक ने संकेत दिया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद अपनी युद्धक क्षमता को बनाए रखा है। उनके अनुसार, तेहरान ने यह साबित कर दिया है कि उसे जीतने के लिए विशाल वायु सेना की आवश्यकता नहीं है; वह अपने छोटे लेकिन प्रभावी हमलों से भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है। Iran-Israel Conflict के इस नए आयाम ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।

इजरायल की प्रतिक्रिया और सैन्य चुनौतियां

इजरायल ने हमेशा ईरान के इन दावों को खारिज किया है और अपनी सैन्य श्रेष्ठता पर जोर दिया है। हालांकि, विश्लेषकों का तर्क है कि जब युद्ध की प्रकृति बदल जाती है, तो पारंपरिक जीत के पैमाने भी बदल जाते हैं। इजरायल के लिए चुनौती अब केवल सीमाओं की रक्षा करना नहीं, बल्कि उस अदृश्य नेटवर्क को ध्वस्त करना है जिसे ईरान ने दशकों में तैयार किया है।

अधिक जानकारी के लिए, आज ही Shabdsanchi के सोशल मीडिया पेजों को फ़ॉलो करें और अपडेटेड रहें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *