क्या अब गोल्ड नहीं है सुरक्षित निवेश! बाजार विशेषज्ञों की क्या है राय?

Is Gold Investment Safe: मिडिल ईस्ट में वॉर की वजह से शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. हालांकि, आज मार्केट में अच्छी तेजी नजर आ रही है, लेकिन उससे पहले बड़ी गिरावट भी देखने को मिली है. गौरतलब है कि इसके कारण निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ गई है और कई लोग सोच रहे हैं कि मौजूदा हालात में क्या रणनीति अपनानी चाहिए. बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच सोना (Gold) एक बार फिर सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन एसेट के रूप में चर्चा में आ गया है.

चलिए आपको बताते हैं कि इस बारे में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं.

अनिश्चितकाल में सुरक्षा देता है सोना

सोना वैश्विक या आर्थिक अनिश्चितताओं के समय निवेशकों के लिए एक तरह का सुरक्षा कवच बन सकता है. उनके अनुसार, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में सोने के लिए तय एसेट एलोकेशन बनाए रखना चाहिए. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो साल में सोने की कीमतों में काफी तेजी आई है, इसलिए आगे रिटर्न को लेकर बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं रखनी चाहिए.

संतुलित एसेट एलोकेशन जरूरी

गौरतलब है कि, सोना लंबे समय से वैश्विक अस्थिरता के खिलाफ एक अच्छा हेज रहा है. हालांकि, इंवेस्टर्स को सिर्फ सोने पर निर्भर नहीं होना चाहिए. बेहतर रणनीति यह है कि पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट, कीमती धातुओं और अन्य वास्तविक एसेट्स के बीच संतुलन बनाए रखा जाए, ताकि बाजार के अलग-अलग दौर में रिस्क को बेहतर तरीके से संभाला जा सके.

कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव

आपको बता दें कि, मौजूदा वैश्विक तनाव की वजह से सोने की मांग बढ़ सकती है, जिससे इसकी कीमतों को सहारा मिल सकता है. हालांकि, निकट अवधि में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. इसके पीछे मजबूत अमेरिकी डॉलर, ऊंची बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें जैसी वजहें हो सकती हैं.

संतुलित एसेट एलोकेशन जरूरी

सबसे खास बात यह है कि, जब भी निवेश करें तब बेहतर रणनीति यह है कि पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट, कीमती धातुओं और अन्य वास्तविक एसेट्स के बीच संतुलन बनाए रखा जाए, ताकि बाजार के अलग-अलग दौर में रिस्क को बेहतर तरीके से संभाला जा सके.

सोने का व्यवहार बदला?

विशेषज्ञों का मानना है कि, सोने को एक स्थिर और सुरक्षित एसेट माना जाता था, लेकिन अब इसका व्यवहार थोड़ा बदलता हुआ नजर आ रहा है. गौरतलब है कि, अब सोना कई बार एक मोमेंटम एसेट की तरह काम करता है, यानी इसकी कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे हो सकती हैं. इसलिए अब इसे पूरी तरह कम जोखिम वाला एसेट मानना सही नहीं होगा और निवेशकों को इसमें निवेश करते समय सावधानी बरतनी चाहिए.

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