International Mother Language Day 2026 : विविधता-सांस्कृतिक पहचान व बहु-भाषिता का वैश्विक उत्सव है अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस-हर वर्ष 21 फरवरी को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है। यह दिन भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान, जागरूकता और बहुभाषिकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समर्पित है। मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति की पहचान, संस्कृति, परंपरा और भावनात्मक जुड़ाव की सबसे सशक्त कड़ी होती है। इस दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 21 फरवरी 1952 से जुड़ी है, जब बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) में छात्रों ने अपनी मातृभाषा बांग्ला को आधिकारिक मान्यता दिलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनकी इस शहादत को सम्मान देते हुए यूनेस्को ने 1999 में 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस घोषित किया, जिसे वर्ष 2000 से विश्व स्तर पर मनाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी को क्यों मनाया जाता है ? जानिए इसका इतिहास, उद्देश्य, महत्व, यूनेस्को की पहल और मातृभाषा को सशक्त बनाने के प्रभावी उपाय।
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का इतिहास
21 फरवरी 1952 को ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से अपनी मातृभाषा को मान्यता दिलाने की मांग की। इस संघर्ष में कई छात्रों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। यही घटना आगे चलकर भाषा अधिकार आंदोलन का प्रतीक बनी और पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि मातृभाषा का संरक्षण केवल सांस्कृतिक नहीं बल्कि मानवीय अधिकार भी है।
इस दिवस के प्रमुख उद्देश्य
मातृभाषाओं का संरक्षण-विश्व की लुप्तप्राय भाषाओं को संरक्षित करना और उनके अस्तित्व को बनाए रखना।
भाषाई विविधता को बढ़ावा-विभिन्न भाषाओं के सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना विकसित करना।
बहुभाषिकता का प्रोत्साहन-समाज में एक से अधिक भाषाओं के प्रयोग को स्वीकार करना और बढ़ावा देना।
शिक्षा में मातृभाषा का उपयोग-प्रारंभिक शिक्षा में मातृभाषा को माध्यम बनाकर बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाना।

यूनेस्को की पहल और वैश्विक दृष्टिकोण
यूनेस्को का मानना है कि मातृभाषा में शिक्षा से बच्चों की सीखने की क्षमता में लगभग 30% तक सुधार हो सकता है। संस्था लगातार यह प्रयास कर रही है कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा मिले, जिससे वे बेहतर तरीके से ज्ञान अर्जित कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। इसके अलावा, वर्ष 2008 को अंतरराष्ट्रीय भाषा वर्ष के रूप में मनाया गया, ताकि बहुभाषी समाज के महत्व को वैश्विक स्तर पर समझाया जा सके।
मातृभाषा का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
मातृभाषा केवल बोलचाल का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा, लोककथाओं, साहित्य और मूल्यों की वाहक होती है। भाषा के माध्यम से ही पीढ़ियों का ज्ञान अगली पीढ़ी तक पहुंचता है। मातृभाषा में भावनाओं की अभिव्यक्ति अधिक स्वाभाविक और प्रभावशाली होती है, जिससे सामाजिक जुड़ाव मजबूत होता है।
जमीनी स्तर पर मातृभाषा को कैसे सशक्त बनाएं ?
- घर और परिवार में बच्चों से मातृभाषा में संवाद करें।
- स्थानीय भाषाओं में साहित्य, कहानियां और लोकगीतों को बढ़ावा दें।
- स्कूलों में मातृभाषा आधारित शिक्षण को प्रोत्साहित करें।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानीय भाषाओं में कंटेंट तैयार करें।
- भाषाई आयोजनों, कवि सम्मेलनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करें।
निष्कर्ष (Conclusion)-अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भाषा केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि हमारी पहचान, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक विरासत की नींव है। मातृभाषा का सम्मान करके ही हम एक समावेशी, सशक्त और बहुभाषी समाज का निर्माण कर सकते हैं। आइए, इस दिवस पर संकल्प लें कि हम अपनी मातृभाषा को न केवल बोलेंगे, बल्कि उसे अगली पीढ़ी तक गर्व के साथ पहुंचाएंगे।
