नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान के हिस्से के सिंधु नदी के पानी को रोकने, बाधित करने या उसका रास्ता बदलने की कोशिश की गई तो पाकिस्तान इसे युद्ध की कार्रवाई मानेगा।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने भारत के उस फैसले की आलोचना की, जिसके तहत सिंधु जल समझौते को फिलहाल स्थगित रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले का कोई कानूनी आधार नहीं है।
कश्मीर और 2025 के संघर्ष का भी जिक्र
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष का जिक्र करते हुए पाकिस्तान की कार्रवाई को अपनी जीत के तौर पर पेश किया।
उन्होंने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर की भी तारीफ की। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का धन्यवाद करते हुए कहा कि 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान ट्रंप की भूमिका से तनाव कम करने में मदद मिली। शहबाज ने कहा कि दक्षिण एशिया में भविष्य में ऐसे हालात से बचने के लिए कश्मीर मुद्दे का समाधान जरूरी है।
भारत ने शहबाज के आरोपों का दिया जवाब
शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र में जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के दावों को खारिज किया।
गहलोत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के दावों पर सवाल उठाया और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकार और हिंसा के मुद्दे का जिक्र किया। उन्होंने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल करता रहेगा।
भारत ने पाकिस्तान की शासन व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए। गहलोत ने पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता, अल्पसंख्यकों की स्थिति और कट्टरता का मुद्दा भी संयुक्त राष्ट्र में उठाया।
सिंधु जल समझौते पर फिर बढ़ा तनाव
सिंधु जल समझौते को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से विवाद चल रहा है। शहबाज शरीफ का संयुक्त राष्ट्र में दिया गया बयान इस विवाद को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले आया है।
पाकिस्तान का कहना है कि भारत उसके हिस्से के पानी को रोक या मोड़ नहीं सकता। वहीं भारत ने सिंधु जल समझौते को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है और पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड तथा सीमा पार आतंकवाद को अपने जवाब में प्रमुख मुद्दा बनाया है।

