Indore Water Contamination: पाप का प्रायश्चित करो- सरकार पर उमा भारती का हमला

Uma Bharti speaking on Indore water contamination with visuals of damaged water pipeline site

Indore Water Contamination Deaths: स्वच्छता के लिए लगातार अवॉर्ड जीतने वाले इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में जहरीला पानी पीने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 5 महीने की मासूम बच्ची से लेकर 80 साल के बुजुर्ग तक शामिल हैं। (Indore Water Contamination Deaths) अस्पतालों में सैकड़ों मरीज भर्ती हैं और हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। इस मामले में अधिकारियों से लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बनती है, लेकिन जिम्मेदार लोग इससे बचते नजर आ रहे हैं। जहां दोषियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी, वहां सिर्फ अपना दामन बचाने की होड़ मची हुई है। अब यह मामला पूरी तरह सियासी रूप ले चुका है। (Bhagirathpura Poisonous Water Crisis) बीजेपी की कद्दावर नेता और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) ने अपनी ही सरकार और सिस्टम पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने सीधे इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव (Pushyamitra Bhargava) पर निशाना साधा। उमा भारती की इस मामले में एंट्री के बाद बवाल मच गया और विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा हथियार मिल गया। (Uma Bharti Indore Mayor Attack)

या तो प्राश्चित होता है या दंड

उमा भारती ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चलती नहीं है? जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठकर बिसलेरी का पानी क्यों पीते हैं? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचते? उन्होंने आगे कहा कि ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता, या तो प्राश्चित होता है या दंड।

उनका मैसेज साफ है कि अगर महापौर जिम्मेदारी नहीं संभाल पा रहे तो पद का लुत्फ उठाने की जरूरत नहीं है। वे खुले तौर पर महापौर पर कार्रवाई चाहती हैं। (Indore Mayor Resignation Demand)दरअसल उमा भारती महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर इसलिए नाराज हैं क्योंकि वे अपनी जिम्मेदारी लेने की बजाय बहाने बना रहे हैं।

कोई मेरी बात नहीं सुनता- इंदौर महापौर

1 जनवरी को इस मामले में उच्च स्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya), जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त दिलीप यादव और जलकार्य प्रभारी बबलू शर्मा मौजूद थे। इस बैठक में महापौर ने आरोप लगाया कि एक ही अधिकारी को सारे काम सौंप दिए गए हैं जबकि बाकी खाली बैठे हैं और अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते।

उमा भारती ने सिर्फ महापौर पर ही नहीं, पूरी सरकार पर कटाक्ष कसते हुए कहा कि इंदौर में गंदा पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित करती हैं। जिंदगी की कीमत दो लाख रुपये नहीं होती क्योंकि परिजन जीवन भर दुख में डूबे रहते हैं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीड़ितों से माफी मांगनी होगी और नीचे से ऊपर तक जिम्मेदारों को अधिकतम दंड देना होगा।

महापौर पर 15 लोगों की हत्या का मुकदमा दर्ज हो

कांग्रेस का हमला भी लगातार जारी है। PCC चीफ जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने उमा भारती के पोस्ट का सहारा लेकर कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा और महापौर पर 15 लोगों की हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की।

संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने भी X पर पोस्ट कर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी लेकिन सरकार ने घमंड परोस दिया। (Rahul Gandhi Indore Water Crisis)

राहुल गांधी ने कैलाश विजयवर्गीय के उस बयान की निंदा की जिसमें वे सवाल पूछ रहे पत्रकार को अपशब्द कहते नजर आए। राहुल ने सवाल उठाए कि सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई क्यों नहीं बंद हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? उन्होंने कहा कि यह फोकट का सवाल नहीं, जवाबदेही की मांग है। साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है और इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है।

मौतें 15 लेकिन सरकार सिर्फ 4 मान रही

इधर सरकार ने नगर निगम कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एडिशनल कमिश्नर को इंदौर से हटा दिया गया और इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर से जल वितरण विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया। सरकार ने हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की, जिसमें सिर्फ 4 मौतों की बात कही गई, जबकि अस्पतालों और परिजनों से 15 मौतों की जानकारी सामने आ चुकी है। जिम्मेदारी तय करने की बजाय मौतों के आंकड़े छुपाने के आरोप लग रहे हैं।

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