Indore Water Contamination : नल के पानी में जहर कहां से आया? सीएम मोहन यादव बोले- लापरवाही क्यों हुई?

Hospital ward in Indore with patients receiving treatment after suspected water contamination

Indore Water Contamination : मध्य प्रदेश के इंदौर में पीने के पानी में जहर घुल गया है। जहरीला पानी पीने से लोग मौत के मुंह में पहुंच गए। दूषित पानी पीने से 100 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराए गए। इनमें से मंगलवार को सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें तीन पुरुष और चार महिलाएं शामिल हैं।

इंदौर में जहरीला पानी पीने से 7 की मौत

बीते सोमवार को इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से लोगों को उल्टी-दस्त शुरू हो गया। लोग धीरे-धीरे बीमार पड़ने लगे, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिनमें 7 लोगों ने दम तोड़ दिया। दूषित पानी पीने वालों में 100 से ज्यादा लोग बीमार हो गए हैं, जो अस्पताल में भर्ती हैं। बता दें कि इंदौर में वार्ड 11 के पार्षद कमल वाघेला ने बताया कि सोमवार रात से ही लोगों के बीमार होने का सिलसिला शुरू हो गया था। सोमवार शाम तक 27 से ज्यादा लोग वर्मा नर्सिंग होम, त्रिवेणी अस्पताल, बीमा अस्पताल और अन्य अस्पतालों में भर्ती हो चुके थे। मंगलवार को वर्मा अस्पताल में पांच नए मरीज आए हैं। अभी भी कई मरीज अन्य अस्पतालों में भर्ती हैं और डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति नियंत्रण में है।

मरने वालों में 4 महिलाएं व 3 पुरुष शामिल

मृतकों में भागीरथपुरा निवासी नंदलाल पाल (75) भी शामिल हैं, जिन्होंने मंगलवार सुबह वर्मा वर्मा नर्सिंग होम में दम तोड़ा। उन्हें 28 दिसंबर को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों का कहना है कि उनकी मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट था, क्योंकि उन्हें पहले से ब्लड प्रेशर की समस्या थी और वे नियमित दवा नहीं ले रहे थे। परिजनों का दावा है कि नंदलाल ने पानी पीने के बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ी।

परिजनों ने कहा- पानी से पेट्रोल की बदबू आ रही थी

वहीं, दूषित पानी पीने से मरने वालों में शामिल महिलाओं के परिजनों ने कहा कि पानी पीने के तुरंत बाद उनकी तबीयत खराब हो गई और फिर उनकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि तीन-चार दिन पहले भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा लाइन से वितरित हुआ पानी केमिकल और पेट्रोल की बदबू आ रही थी। उन्होंने इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। संभव है कि इसी दूषित पानी को पीने से लोग बीमार हुए हैं।

सीएम मोहन यादव ने PHE को किया निलंबित

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए देर रात संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। उन्होंने जोनल अधिकारी और प्रभारी असिस्टेंट इंजीनियर (पीएचई) को तुरंत निलंबित किया गया है, जबकि प्रभारी डिप्टी इंजीनियर की सेवा समाप्त कर दी गई है। साथ ही, इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की भी घोषणा की है, और बीमार लोगों का उचित इलाज करवाने के निर्देश दिए हैं।

ये हैं निलंबित अधिकारी

इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि भागीरथपुरा मामले में तुरंत प्रभाव से जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, वे हैं- जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले, सहायक यंत्री योगेश जोशी, और प्रभारी उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव। इन सभी के खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति भी गठित की गई है, जिसमें आईएएस श्री नवजीवन पंवार के नेतृत्व में जांच की जाएगी। समिति में प्रदीप निगम, सुप्रिडेंट इंजीनियर और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय भी शामिल हैं। इंदौर प्रशासन ने बताया कि पूरे मामले की निगरानी की जा रही है।

मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये देने की घोषणा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह घटना बहुत ही दुखद है। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, उपचाररत लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने यह भी कहा कि मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी और सरकार उनकी इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी। साथ ही, पेयजल की गुणवत्ता पर नजर रखने और जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।

मामले की हो रही जांच

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिस पानी की लाइन का टेंडर सातवें महीने में लगा था, उसमें आखिर क्यों देरी हुई, इसकी भी जांच कराई जाएगी। उन्होंने निगम आयुक्त को निर्देशित किया है कि पूरी घटना की जांच कर सही दोषियों पर कार्रवाई की जाए। दोषियों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग को मरीजों का उपचार सही तरीके से हो रहा है, इसकी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, इंदौर का स्वास्थ्य अमला पूरी तरह से सक्रिय है और घटना के पीछे असली कारण का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

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