इंदौर की आकांक्षा ने अफ्रीका की उॅची चोटी पर लहराया तिरंगा, माउंट किलिमंजारो की यात्रा की पूरी

इंदौर। कहते है हौसलें अगर बुलंद हो तो सफलता उसके कदम चूमती है, क्योकि वह हर परिस्थिती में सामना करते हुए केवल अपने लक्ष्य पर आडिग रहती है। ऐसी ही एक सफलता को मध्यप्रदेश की बेटी आकांक्षा शर्मा ने अर्जित किया है। इंदौर की रहने वाली पर्वतारोही आकांक्षा शर्मा ने 19341 फीट की उॅची चोटी पर चढ़ कर भारतीय तिरंगा लहराई है। आकांक्षा ऐसे कठिन रास्तो का सफर पहले भी कर चुकी है और इसके पूर्व उन्होने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस के उॅची चोटी की यात्रा कर चुकी है। ये दोनों चोटियां विश्व की प्रतिष्ठित सेवन समिट्स में शामिल हैं।

पेशे से है इंजीनियर

आकांक्षा पेशे से सिविल इंजीनियर है। आकांक्षा का कहना था कि माउंट किलिमंजारो की तैयारी के लिए उन्होंने नियमित रूप से रनिंग की, जिम में ट्रेनिंग की और सीढ़ियों पर चढ़ने-उतरने का अभ्यास किया। वे पांचवीं मंजिल पर रहती हैं और बिल्डिंग के बाहर की सीढ़ियों पर अभ्यास करने से उन्हें विशेष लाभ मिला। इसके अलावा उन्होंने प्राणायाम का अभ्यास भी किया, जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिली।

ऑक्सीजन की कंमी का किया सामना

माउंट किलिमंजारो पर्वत की ऊंचाई पर है। जिसके चलते शिखर पर ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। आकांक्षा को भी चढ़ाई के दौरान ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ा। उन्हें सांस लेने में कठिनाई हो रही थी और एक-एक कदम बढ़ाना भी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और विषम परिस्थितियों में भी चढ़ाई पूरी की। चढ़ाई के दौरान तापमान 12 डिग्री था और हवा 20 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही थी। दोनों शिखरों पर चढ़ाई करने वाली इंदौर की संभवतः पहली पर्वतारोही हैं। साथ ही वे ऐसा करने वाली मध्य भारत की चुनिंदा पर्वतारोहियों में भी शामिल हो गई हैं।

दिखी भारतीय संस्कृति

चोटी पर पहुंचने के बाद आकांक्षा ने कश्मीरी कानी साड़ी पहनकर अपनी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाया। उनका कहना था कि यह परिधान उन्हें अपने भारतीय होने का एहसास कराता है यह अभियान आकांक्षा ने सफारी टच तंजानिया कंपनी के साथ पूरा किया। इस अभियान में वे अपने समूह की एकमात्र पर्वतारोही थीं।

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