Indore Contaminated Water: NHRC ने लिया संज्ञान, MP सरकार से मांगी रिपोर्ट

National Human Rights Commission building in New Delhi, used to illustrate NHRC action on Indore contaminated water case

Indore Contaminated Water: इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति से कई लोगों की मौत और सैकड़ों के बीमार पड़ने की घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इस मामले को मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मुद्दा मानते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है तथा दो सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

Indore Contaminated Water: इंदौर शहर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति से उत्पन्न संकट गंभीर रूप ले चुका है। पाइपलाइन लीकेज के कारण सीवेज का पानी मिलने से कई लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों बीमार पड़ गए हैं। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार उल्लंघन का मामला मानकर राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

NHRC का सख्त रुख: मुख्य सचिव को नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इस घटना का स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग का कहना है कि स्थानीय निवासियों ने कई दिनों से दूषित पानी की शिकायत की थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ है। NHRC ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में दूषित पानी की वजह, मौतों का विवरण, राहत कार्य और दोषियों पर कार्रवाई की जानकारी शामिल होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय बैठक और राहत घोषणाएं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संभागीय आयुक्त सुदाम खड़े, जिला कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के भगीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों की घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और उपचाराधीन मरीजों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने घोषणा की कि हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक परिवार को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, दूषित पानी से प्रभावित सभी लोगों का निशुल्क इलाज कराया जाएगा तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

लापरवाही पर कार्रवाई शुरू

प्रारंभिक जांच में पाया गया कि पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का पानी मिल गया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कई अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जिसमें कुछ को सस्पेंड किया गया है। शहर में पानी की जांच और टैंकरों से आपूर्ति का इंतजाम किया गया है।

अधिक जानने के लिए आज ही शब्द साँची के सोशल मीडिया पेज को फॉलो करें और अपडेटेड रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *