डॉलर के मुकाबले रुपया 91.58 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा

Stack of Indian 500 rupee notes with a golden Rupee symbol on top against a blue background.

भारतीय करेंसी में गिरावट का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा और डॉलर के मुकाबले रुपया 91.58 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में ही रुपये में 61 पैसे की भारी गिरावट दर्ज की गई। विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने रुपये की सेहत बिगाड़ दी है।

भारतीय मुद्रा के लिए साल 2026 की शुरुआत काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। बुधवार को बाजार खुलते ही रुपये पर जबरदस्त दबाव देखा गया। इससे पहले मंगलवार को भी रुपया 90.97 के स्तर पर बंद हुआ था, जो उस समय का रिकॉर्ड निचला स्तर था। पिछले कुछ सत्रों से लगातार जारी यह गिरावट अब नीति निर्माताओं और आयातकों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

Indian Rupee Hits Record Low Against US Dollar

फॉरेक्स ट्रेडर्स का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई बड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक कारण काम कर रहे हैं। विशेष रूप से मेटल आयातकों की ओर से डॉलर की भारी मांग ने स्थानीय मुद्रा को बैकफुट पर धकेल दिया है। बाजार में तरलता (Liquidity) की स्थिति और डॉलर की मजबूती ने निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी बड़ी वजह

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रुख इस समय नकारात्मक बना हुआ है। NSDL के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी 2026 के शुरुआती हफ्तों में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी और डेट मार्केट से 2.7 बिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति बेच दी है।

जब भी विदेशी निवेशक अपना निवेश वापस खींचते हैं, तो वे अपनी पूंजी को डॉलर में बदलकर बाहर ले जाते हैं। इस प्रक्रिया में बाजार में डॉलर की मांग बहुत बढ़ जाती है और रुपये की वैल्यू कम होने लगती है। पिछले साल यानी 2025 में भी रुपये में करीब 4.95% की गिरावट देखी गई थी, और अब यह ट्रेंड और भी गहराता दिख रहा है।

डॉलर के मुकाबले रुपया और वैश्विक परिस्थितियों का दबाव

अमेरिकी अर्थव्यवस्था से मिल रहे नए विस्तारवादी संकेतों (Expansionary signals) ने दुनिया भर की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को संकट में डाल दिया है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव के कारण निवेशक अब जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे हैं।

Indian Rupee Hits Record Low Against US Dollar January 2026

इस जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (Risk aversion) का सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ रहा है। घरेलू स्तर पर शेयर बाजार का प्रदर्शन भी पिछले कुछ समय से उत्साहजनक नहीं रहा है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। 16 दिसंबर 2025 को रुपये ने 91.14 का जो इंट्रा-डे लो स्तर छुआ था, आज वह रिकॉर्ड भी टूट चुका है।

आरबीआई का रुख और बाजार का हस्तक्षेप

बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। बैंकिंग सूत्रों के अनुसार, जब रुपया 91 के स्तर को पार कर रहा था, तब केंद्रीय बैंक ने बाजार में हल्का हस्तक्षेप किया था। हालांकि, यह हस्तक्षेप रुपये की गिरावट को रोकने के लिए नहीं, बल्कि उसकी रफ्तार को नियंत्रित करने के लिए था।

जानकारों का तर्क है कि केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को तेजी से खर्च नहीं करना चाहता है, खासकर तब जब डॉलर की मांग बहुत अधिक हो। वर्तमान में सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ी हुई है और शेयर बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं, ऐसे में रुपये के लिए फिलहाल राहत की उम्मीद कम नजर आती है।

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