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Indian Railways Changes 2026-27: सफर होगा हाई-टेक और आसान

भारतीय रेलवे (Indian Railways) वित्त वर्ष 2026-27 में यात्रियों के सफर को अधिक सुविधाजनक, डिजिटल और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए कई बड़े बदलाव लागू करने जा रहा है। रेल मंत्रालय ने टिकटिंग सिस्टम से लेकर नई ट्रेनों और इंफ्रास्ट्रक्चर तक व्यापक सुधार की योजना बनाई है, जिनका सीधा असर करोड़ों यात्रियों पर पड़ेगा।

टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के नए नियम

भारतीय रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया है। अब यात्रियों को ट्रेन छूटने से कम से कम 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल करना अनिवार्य होगा, तभी उन्हें रिफंड मिल सकेगा। पहले यह समय सीमा 4 घंटे थी, जिसे बढ़ाकर 8 घंटे कर दिया गया है। नए नियमों के तहत यदि कोई यात्री 24 घंटे से 8 घंटे के बीच टिकट कैंसिल करता है, तो उसे कुल किराए का 50 प्रतिशत रिफंड मिलेगा, लेकिन यदि टिकट ट्रेन के निर्धारित समय से 8 घंटे से कम समय पहले कैंसिल किया जाता है, तो किसी भी प्रकार का रिफंड नहीं दिया जाएगा। यह व्यवस्था 15 अप्रैल तक लागू होने की संभावना है और इसका उद्देश्य अंतिम समय में होने वाली अनावश्यक कैंसिलेशन को रोकना है।

काउंटर टिकट अब किसी भी स्टेशन से कैंसिल

रेलवे ने काउंटर टिकट धारकों को बड़ी राहत देते हुए कैंसिलेशन प्रक्रिया को सरल बना दिया है। अब यात्रियों को अपने टिकट कैंसिल कराने के लिए उसी स्टेशन पर जाने की जरूरत नहीं होगी, जहां से टिकट लिया गया था या जहां तक यात्रा करनी थी। नई व्यवस्था के तहत देश के किसी भी रेलवे स्टेशन के काउंटर से टिकट कैंसिल कराया जा सकेगा और रिफंड प्राप्त किया जा सकेगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा और उन्हें अनावश्यक यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।

बोर्डिंग स्टेशन बदलने की नई सुविधा

रेलवे ने बोर्डिंग स्टेशन बदलने के नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब यात्री ट्रेन के प्रारंभिक स्टेशन से छूटने के 30 मिनट पहले तक डिजिटल माध्यम से अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। पहले यह सुविधा चार्ट बनने से पहले तक ही सीमित थी। नए नियम के तहत यदि कोई यात्री अपने निर्धारित स्टेशन से ट्रेन नहीं पकड़ पाता है, तो वह अगले स्टेशन को बोर्डिंग पॉइंट बनाकर अपनी कन्फर्म सीट पर यात्रा जारी रख सकता है। यह सुविधा यात्रियों को अधिक लचीलापन प्रदान करेगी।

ट्रेन में ट्रैवल क्लास अपग्रेड की सुविधा

रेलवे यात्रियों को अब ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक अपनी ट्रैवल क्लास अपग्रेड करने की सुविधा देने जा रहा है। इसका मतलब है कि यदि किसी यात्री ने स्लीपर क्लास का टिकट लिया है और एसी क्लास में सीट उपलब्ध है, तो वह अंतिम समय में अपनी क्लास अपग्रेड कर सकता है। पहले यह सुविधा केवल चार्ट बनने से पहले तक ही उपलब्ध थी। इस बदलाव से खाली सीटों का बेहतर उपयोग होगा और यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा।

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च

भारत अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन को ट्रैक पर उतारने के बेहद करीब है। इस प्रोजेक्ट पर Research Design and Standards Organisation ने काम पूरा कर लिया है और ट्रायल सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। यह ट्रेन 10 कोच की होगी, जिसमें दो पावर कार और आठ पैसेंजर कोच शामिल होंगे। इसकी पावर क्षमता 2400 किलोवाट होगी, जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल करती है। यह ट्रेन पारंपरिक ईंधन के बजाय हाइड्रोजन से चलेगी और प्रदूषण के रूप में केवल पानी की भाप छोड़ेगी, जिससे यह पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल परिवहन का उदाहरण बनेगी।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की शुरुआत

लंबी दूरी के यात्रियों के लिए रेलवे इस वर्ष 12 नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू करने जा रहा है। यह ट्रेनें हाई स्पीड और प्रीमियम सुविधाओं के साथ लंबी दूरी के सफर को अधिक आरामदायक बनाएंगी। हावड़ा से कामाख्या रूट पर ऐसी दो ट्रेनें पहले ही शुरू की जा चुकी हैं। इस परियोजना में Bharat Heavy Electricals Limited और अन्य कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं। आने वाले समय में इन ट्रेनों की संख्या और बढ़ाई जाएगी, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

रेलवे स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया का निर्माण

रेलवे ने प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण के लिए 75 नए होल्डिंग एरिया बनाने की योजना बनाई है। इन होल्डिंग एरिया का उद्देश्य यात्रियों को ट्रेन आने तक एक व्यवस्थित स्थान पर ठहरने की सुविधा देना है, जिससे प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक भीड़ कम हो सके। इस मॉडल को पहले New Delhi Railway Station पर लागू किया गया था, जहां इसे सफल पाया गया। अब इसे देश के अन्य व्यस्त स्टेशनों पर भी लागू किया जाएगा।

रेलवे नेटवर्क का पूर्ण इलेक्ट्रिफिकेशन

भारतीय रेलवे अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क को पूरी तरह इलेक्ट्रिफाई करने के लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुका है। वर्तमान में लगभग 99.2 प्रतिशत नेटवर्क का विद्युतीकरण किया जा चुका है, जो 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करता है। वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक इसे 100 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस कदम से रेलवे की ईंधन लागत में कमी आएगी, संचालन अधिक कुशल होगा और पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव भी कम होगा।

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