Indian Army Day 2026 : स्वयं से पहले सेवा की गौरवगाथा का ही पर्याय है भारतीय थल सेना दिवस-भारतीय थल सेना दिवस (Indian Army Day) हर वर्ष 15 जनवरी को पूरे देश में गर्व और सम्मान के साथ मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन, बलिदान और राष्ट्रसेवा की भावना को नमन करने का अवसर प्रदान करता है। 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने भारत के अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में यह दिन सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारतीय सेना का आदर्श वाक्य “स्वयं से पहले सेवा (Service Before Self)” केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर सैनिक के जीवन का मूल मंत्र है, जो देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान देने की प्रेरणा देता है।
भारतीय थल सेना दिवस क्यों मनाया जाता है ?
भारतीय थल सेना दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य है-भारतीय सेना के वीर जवानों के साहस और बलिदान को सम्मान देना
युवाओं में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना को प्रेरित करना। सेना की उपलब्धियों, अनुशासन और आधुनिक क्षमताओं से नागरिकों को अवगत कराना। यह दिन यह भी याद दिलाता है कि हमारी स्वतंत्रता और सुरक्षा के पीछे सैनिकों का निरंतर संघर्ष और त्याग निहित है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय सेना की औपचारिक स्थापना-1 अप्रैल 1895 जबकि 15 जनवरी 1949–के.एम. करियप्पा स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने,ब्रिटिश शासन से पूर्ण सैन्य नेतृत्व भारत के हाथों में आया,बाद में के.एम. करियप्पा को फील्ड मार्शल की उपाधि से सम्मानित किया गया-यह दिन भारत की सैन्य स्वायत्तता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
भारतीय थल सेना का महत्व
भारतीय थल सेना-देश की सीमाओं की रक्षा करती है,आपदा राहत, बचाव कार्य और आंतरिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है,विश्व की सबसे बड़ी और शक्तिशाली सेनाओं में गिनी जाती है और सेना का अनुशासन,साहस और संगठनात्मक क्षमता भारत की राष्ट्रीय शक्ति का आधार है।
कैसे मनाया जाता है-भारतीय थल सेना दिवस ?
भारतीय थल सेना दिवस के अवसर पर-नई दिल्ली और सभी सेना मुख्यालयों में भव्य सैन्य परेड आयोजित होती हैं तथा आधुनिक हथियारों, टैंकों और सैन्य तकनीक की प्रदर्शनियां लगाई जाती हैं। वीर नारियों, युद्ध नायकों और पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया जाता है शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है और ये विशेष आयोजन सेना और आम नागरिकों के बीच सम्मान और विश्वास के सेतु को मजबूत करते हैं।
स्वयं से पहले सेवा-एक जीवन दर्शन
भारतीय सेना का आदर्श वाक्य “स्वयं से पहले सेवा” यह दर्शाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है,व्यक्तिगत सुख-दुख से ऊपर देश की सुरक्षा है। सैनिक हर परिस्थिति में कर्तव्य को प्राथमिकता देता है यह दर्शन भारतीय सेना को विशिष्ट और प्रेरणादायक बनाता है।
निष्कर्ष-Conclusion-भारतीय थल सेना दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा, साहस और बलिदान का उत्सव है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम सुरक्षित हैं क्योंकि कोई सीमा पर जाग रहा है। 15 जनवरी को मनाया जाने वाला यह पर्व हर भारतीय को सेना के योगदान के प्रति कृतज्ञ बनने और देशसेवा की भावना को अपनाने की प्रेरणा देता है।
भारतीय सेना न केवल हमारी रक्षा करती है, बल्कि भारत की आत्मा, सम्मान और संप्रभुता की रक्षक भी है।

