भारत-अमेरिका ट्रेड डील की बैक स्टोरी: अजीत डोभाल ने सीधा धमकाया था?

India US Trade Deal Ajit Doval Role: जब से ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने उसके बाद से ही भारत और अमेरिका के संबंध बिगड़ने लगे. ऑपरेशन सिन्दूर (Operation Sindoor) के बाद ट्रंप के भारत विरोधी बयानों ने इस खाई को और गहरा किया और जब भारत ने रूस और चीन से दोस्ती बढ़ाई तो ट्रंप तिलमिला उठे. पीएम मोदी की व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग से हुई मुलाकात के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल (NSA Ajit Doval) को अमेरिका भेजा गया जहां उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री को साफ़-साफ़ धमकी दे डाली और इसका नतीजा ये रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति समझ गए कि वे भारत पर दवाब नहीं बना सकते।

अजित डोवाल ने कहा था- हम ट्रंप के जाने का इंतजार करेंगे

जब NSA Ajit Doval को वाशिंगटन भेजा गया तब उनकी मुलाकात विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) से हुई. इस बैठक में अजित डोवाल ने कहा कि ‘भारत, अमेरिका के साथ चल रही कड़वाहट को दूर करना चाहता है और दोबारा बातचीत करने के लिए तैयार है. मगर भारत किसी तरह के दवाब में नहीं आएगा। अगर अमेरिका, भारत के प्रति सख्त रुख अपनाता है तो भारत अमेरिका के राष्ट्रपति के मौजूदा कार्यकाल को खत्म करने का इंतजार भी कर सकता है. भारत ने पहले भी अमेरिका की मुश्किल सरकारों का सामना किया है.

भारत विरोधी बयान बंद करें ट्रंप

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार अजित डोभाल ने यह भी कहा था कि ‘भारत चाहता है कि ट्रम्प और उनके सहयोगी भारत के खिलाफ खुलेआम विरोधी बयान देना बंद करें ताकि रिश्ते दोबारा पटरी पर आ सकें। ये उस समय की बात है जब ट्रंप लगातार भारत पाकिस्तान युद्ध को रोकने का क्रेडिट ले रहे थे, भारत को डेड इकोनॉमी कह रहे थे और भारतीय सामान पर 50% टेरिफ लगा दिया था.

डोभाल की इस मुलाकात के बाद से ही हालात बदलने लगे थे. इसके बाद ट्रंप ने मोदी को जन्मदिन पर फोन किया, उनकी तारीफ की और इसके बाद दोनों नेताओं के बीच कई बार फोन पर बात हुई और अब दोनों देशों के बीच ट्रेड डील फाइनल हो गई.

ट्रंप के ऐलान वास्तविकता से अलग

ट्रंप ने हाल ही में India America Trade Deal पर कहा कि भारत, अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा वो भी बिना टैक्स के और हम भारत के उत्पादों पर 18% टैक्स लेंगे। ट्रंप ने भी कहा था कि भारत रूस की जगह वेनेजुएला से तेल लेगा। ब्लूमबर्ग का कहना है कि जो लोग ट्रेड बातचीत में शामिल थे, उन्हें भी उस दिन मोदी और ट्रम्प की कॉल के बारे में पहले से जानकारी नहीं थी। भारत सरकार ने इन बातों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और कोई लिखित समझौता भी सामने नहीं आया है।

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