India Reaction On Khamenei Death : इजराइल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद पूरे ईरान में प्रदर्शन हो रहें हैं। अमेरिका के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आये हैं और बदला लेने की मांग की है। हालांकि ईरान के कुछ इलाकों में खामेनेई की मौत का जश्न भी मनाया जा रहा है। अपने सर्वोच्च नेता को खोने के बाद ईरान बदले की आग में जल रहा है और अमेरिकी बेस पर मिसाइलें दागी हैं और इजराइल सहित दुबई, UAE, कतर जैसे देशों पर भी हमले कर रहें हैं।
इस बीच भारत के किए मुसीबत की घड़ी आ गई है। चूँकि दिल्ली में ईरानी दूतावास ने प्रेस रिलीज जारी कर भारत से ये मांग कर दी है कि दिल्ली अमेरिकी और इजराइली हमलों की निंदा करें। मगर, भारत ने हाल ही में अमेरिका और इजराइल से व्यापारिक संबंध मजबूत किए हैं, ऐसे नेतान्यूह और डोनाल्ड ट्रंप से रिश्ते खराब नहीं कर सकता। इसके साथ ही ईरान से भी भारत के पुराने और मजबूत संबंध रहें हैं।
ईरानी दूतावास ने भारत से की ये अपील | Khamenei Death US Israel
रविवार को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई (Iran supreme leader khamenoi death) की मौत पुष्टि होने के बाद नई दिल्ली में ईरानी दूतावास की तरफ से जारी प्रेस रिलीज ने सनसनी फैला दी है। ईरान ने अयातुल्ला खामेनेई की मौत को सामान्य नहीं, बल्कि अमेरिका और इजरायल का ‘कायराना हमला’ करार दिया है। इस पर ईरान ने भारत से साफ लहजे में उम्मीद जताई है कि दिल्ली इस ‘अपराध’ की कठोर निंदा करे।
ईरानी दूतावास ने हमले को बताया ‘अमेरिकी-इजरायली साजिश’
ईरानी दूतावास ने सीधे तौर पर अमेरिका और इजराइल को खामेनेई की मौत का जिम्मेदार ठहराया है। प्रेस रिलीज में इसे ‘अक्षम्य अपराध’ बताते हुए कहा गया है कि इन देशों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ईरानी दूतावास का कहना है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। भारत में बैठे कूटनीतिक जानकार इसे ईरान की तरफ से ‘युद्ध का संकेत’ मान रहे हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने का खतरा है।
इशारों में ईरान ने भारत को पाकिस्तानी हमले की धमकी दे डाली
ईरानी दूतावास ने भारत के लिए जारी प्रेस रिलीज में बड़ी धमकी भी दे डाली। ईरान ने इशारों-इशारों में पाकिस्तान का नाम लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है कि अगर पड़ोसी देशों ने साथ नहीं दिया, तो क्षेत्र में अस्थिरता का ‘बम’ फट सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें भारत के स्टैंड पर टिकी हैं।
पाकिस्तान का नाम लेकर दिल्ली की बढ़ाई टेंशन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने संकेत दिए हैं कि अगर भारत इस ‘आतंक’ का विरोध नहीं करेगा, तो पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश इसका फायदा उठा सकते हैं। पाकिस्तान पहले से ही ईरान के साथ सीमाई इलाकों में सक्रिय है। ईरान का तर्क है कि अगर क्षेत्र का सबसे बड़ा लोकतंत्र (भारत) चुप रहा, तो इससे कट्टरपंथी ताकतें फली-फूलींगी। यह भारत के लिए दोहरी चुनौती है—इजराइल से दोस्ती बचानी हो या ईरान के जरिए पाकिस्तान को काबू में रखना।
भारत ने ईरान की मदद नहीं की तो होगा आर्थिक नुकसान
भारत ने चाबहार पोर्ट में जबरदस्त निवेश किया है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया का मुख्य रास्ता है। ईरान की नई सैन्य शक्ति (IRGC) इस प्रोजेक्ट का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर सकती है। अगर भारत ने ईरान की मांगों पर सख्ती नहीं दिखाई, तो भारत का अरबों का निवेश और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स अटक सकते हैं। साथ ही, 14,000 करोड़ का द्विपक्षीय व्यापार भी प्रभावित हो सकता है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच बुरा फंसा भारत
ईरान ने भारत जैसे ‘स्वतंत्र और न्यायप्रिय’ देशों से अपील की है कि वे इस घटना पर खामोशी न बरतें। ईरान चाहता है कि भारत ग्लोबल मंच पर अमेरिका और इजराइल की मुखर निंदा करे। भारत के लिए यह बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है, क्योंकि एक तरफ हमारे इजराइल और अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ पारंपरिक और व्यापारिक संबंध। दिल्ली की एक छोटी सी चूक भारत के हितों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
पीएम मोदी ने बुलाई बड़ी बैठक | PM Modi Meeting
भारत इस वक्त ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपना रहा है। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक बुलाई है। बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद होंगे। अब दिल्ली को तय करना है कि वह ईरान के प्रति मानवीय संवेदना दिखाए या इजराइली हमले की निंदा कर अमेरिका का सामना करे।
